April 18, 2026

मायावती की जातीय जनगणना की वकालत, सत्ता की मास्टर चाबी पर दी जोरदार चेतावनी

नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने जातीय जनगणना को लेकर एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है और सरकार से इसे जल्द से जल्द लागू करने की अपील की है। मायावती ने कहा कि सरकार को इस महत्वपूर्ण मसले पर त्वरित कदम उठाने चाहिए, क्योंकि जनगणना देश के निर्माण से जुड़ा हुआ अहम कार्य है। उन्होंने कहा कि यह कदम देश और समाज के विकास की दिशा को सही मोड़ देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

जातीय जनगणना पर सरकार से शीघ्र कदम उठाने की मांग

मायावती ने जोर देकर कहा कि जातीय जनगणना का काम सिर्फ एक आंकड़ा इकट्ठा करने का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज की संरचना और उसकी जरूरतों को समझने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा, “सरकार को इस दायित्व के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यह देश के समग्र विकास में योगदान करने वाला कदम हो सकता है। संसदीय समिति ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है और ऐसे में यह वक्त की जरूरत बन चुकी है कि सरकार तुरंत इस पर ध्यान दे।”

कांशीराम की जयंती पर किया याद, पार्टी के उद्देश्य को बताया स्पष्ट

बसपा संस्थापक कांशीराम की 91वीं जयंती पर मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी उनके विचारों और सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। मायावती ने कहा, “उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी ने देखा है कि कैसे ‘आयरन लेडी’ के नेतृत्व में बसपा पार्टी ने हमेशा बातों से ज्यादा काम को महत्व दिया है। यह पार्टी सत्ता में रहते हुए बहुजन समाज के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए समर्पित रही है, जबकि अन्य दलों द्वारा किए गए अधिकांश दावे झूठे और भ्रामक साबित हुए हैं।”

संविधान में जनगणना का प्रावधान, लेकिन सरकार का ढिलाई भरा रवैया

मायावती ने संविधान में डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा किए गए प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि बहुजन समाज के हित और कल्याण की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय जनगणना का प्रावधान रखा गया था, जिसका अब तक लंबित रहना देश में सुशासन की कमी को दर्शाता है। उनका कहना था कि जातीय जनगणना के बिना सामाजिक और आर्थिक असमानताओं का सही तरीके से आंकलन और समाधान नहीं किया जा सकता।

सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करना जरूरी: मायावती की चेतावनी

मायावती ने अपने संबोधन में देश में बढ़ते जातिवाद और सांप्रदायिक राजनीति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संकीर्ण राजनीति हावी हो गई है, जबकि देश को महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा, और पिछड़ेपन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, बहुजन समाज को इन समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए अपने बहुमूल्य वोट की ताकत को समझना होगा और सत्ता की मास्टर चाबी को हासिल करना जरूरी है।

देश में हो रहे विवादों पर गहरी चिंता जताई

मायावती ने देश में धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर हो रहे विवादों पर चिंता जताते हुए कहा कि इन मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय, देश के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उनका मानना था कि इस तरह के संकीर्ण विवादों से देश और समाज की प्रगति में रुकावट आती है।

आयरन लेडी का संकल्प: बहुजन समाज की स्थिति सुधारने का दृढ़ निश्चय

मायावती ने खुद को ‘आयरन लेडी’ बताते हुए यह स्पष्ट किया कि उनका पूरा प्रयास बहुजन समाज के उत्थान के लिए है। वे हमेशा से यह मानती रही हैं कि इस समाज को अपनी ताकत समझकर खुद को राजनीति में मजबूती से स्थापित करना होगा, ताकि वह उत्पीड़न, शोषण और सामाजिक असमानताओं से मुक्ति पा सके। उनका कहना था, “हमारी पार्टी के उद्देश्य साफ हैं, हम हर कदम पर अपने लोगों के लिए संघर्ष करेंगे और सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करेंगे ताकि समाज में वास्तविक बदलाव लाया जा सके।”

आगे की राह: मायावती का स्पष्ट संदेश

मायावती का यह संदेश साफ था कि बहुजन समाज के हितों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा, और वे कभी भी इस मार्ग से पीछे नहीं हटेंगी। उनका यह बयान एक बार फिर से देश की राजनीति में हलचल मचाने के लिए काफी है, और उनकी पार्टी आगामी चुनावों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर बहुजन समाज के लिए एक मजबूत मंच बनाने का प्रयास करेगी।

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