मणिपुर में CRPF कैंप में ताबड़तोड़ फायरिंग, तीन जवान शहीद – आखिर क्यों बरसाई गई गोलियां?
मणिपुर में गुरुवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। इंफाल पश्चिम जिले के लामफेल स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) कैंप में अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी। जवानों को समझ ही नहीं आया कि हो क्या रहा है। कुछ ही पलों में कैंप में अफरा-तफरी मच गई। जब तक स्थिति साफ होती, तब तक तीन जवानों की जान जा चुकी थी, आठ गंभीर रूप से घायल थे और फायरिंग करने वाला जवान भी खुद को गोली मार चुका था।
फायरिंग करने वाला जवान कौन था? उसने ऐसा कदम क्यों उठाया? क्या यह मानसिक तनाव का नतीजा था या कोई और वजह थी? इन सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा बलों के भीतर तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
घटना को अंजाम देने वाला जवान 120वीं बटालियन का हवलदार संजय कुमार था, जो असम का रहने वाला था। वह त्रिसुंडी स्थित CRPF कैंप में तैनात था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रात करीब 8:20 बजे, अचानक संजय कुमार ने अपनी राइफल से अपने ही साथियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। कैंप में मौजूद जवानों को समझ नहीं आया कि अचानक यह हमला क्यों हुआ। कई जवानों ने भागकर खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन तीन जवान गोलियों की चपेट में आ गए और मौके पर ही दम तोड़ दिया।
फायरिंग करने के बाद हवलदार संजय कुमार ने अपनी ही राइफल से खुद को गोली मार ली। उसकी मौत मौके पर ही हो गई। इस घटना के पीछे क्या कारण था, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस और CRPF के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और जांच जारी है।
घायल आठ जवानों को तुरंत इंफाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन घायलों में से एक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या तीन से बढ़कर चार हो गई। बाकी घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
घटना के बाद CRPF के वरिष्ठ अधिकारी कैंप में पहुंच गए हैं और स्थिति का जायजा ले रहे हैं। लेकिन अभी तक किसी भी सीनियर अधिकारी ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस घटना के पीछे की असली वजह सामने आएगी।
इस घटना ने सुरक्षा बलों के भीतर मानसिक तनाव और मेंटल हेल्थ को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या जवान लंबे समय तक तनाव में था? क्या किसी तरह के व्यक्तिगत या पेशेवर विवाद ने उसे ऐसा करने पर मजबूर किया? या फिर यह अचानक गुस्से में उठाया गया कदम था? इन सभी सवालों के जवाब फिलहाल जांच के बाद ही सामने आएंगे।
यह पहली बार नहीं है जब सुरक्षा बलों में इस तरह की फ्रेट्रिसाइड (अपने ही साथियों पर हमला) की घटना हुई हो। इससे पहले भी कई बार जवानों द्वारा अपने ही साथियों पर फायरिंग करने और फिर आत्महत्या करने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे मामलों में अक्सर मानसिक तनाव, ड्यूटी का दबाव और पारिवारिक समस्याओं को कारण बताया जाता है।
इस दर्दनाक घटना के बाद CRPF और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से ले रही हैं। जवानों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई रणनीतियां अपनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। क्या इस घटना के बाद सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिया जाएगा? क्या जवानों को काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराया जाएगा? यह देखना बाकी है।
मणिपुर में CRPF कैंप में हुई इस घटना ने पूरे सुरक्षा तंत्र को झकझोर दिया है। जवानों की मौत से उनके परिवार और साथी सदमे में हैं। अब सभी की निगाहें जांच पर टिकी हैं कि आखिर इस घटना की असली वजह क्या थी। क्या यह तनाव और दबाव की वजह से हुआ या फिर इसके पीछे कोई और कारण था? इन सवालों के जवाब जल्द सामने आएंगे, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
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