Mamata Banerjee सरकार में 850 करोड़ से बन रहे तीन भव्य मंदिर, बंगाल को मिलेंगे नए धार्मिक और पर्यटन केंद्र

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पश्चिम बंगाल में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व में करीब 850 करोड़ रुपये की लागत से तीन भव्य मंदिरों का निर्माण और विकास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं में Siliguri का महाकाल महातीर्थ मंदिर, Kolkata का दुर्गा आंगन और Digha का जगन्नाथ मंदिर शामिल हैं। ये मंदिर न केवल आस्था के प्रमुख केंद्र बनेंगे, बल्कि राज्य के पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

सबसे पहले बात करें Siliguri में बन रहे महाकाल महातीर्थ मंदिर की, तो यह परियोजना उत्तर बंगाल की सबसे बड़ी धार्मिक योजनाओं में से एक है। करीब 17.41 एकड़ में फैले इस मंदिर के निर्माण पर 344 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया जा रहा है, जिससे यह राज्य का सबसे महंगा मंदिर बनने जा रहा है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित होने वाली 216 फीट ऊंची शिव प्रतिमा होगी, जिसे देश की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में गिना जाएगा। इसके अलावा परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां, एक कन्वेंशन सेंटर और म्यूजियम भी बनाए जाएंगे, जो इसे एक समग्र धार्मिक-पर्यटन केंद्र बनाएंगे।

दूसरी बड़ी परियोजना Kolkata के न्यू टाउन इलाके में बन रहा दुर्गा आंगन है। करीब 262 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस मंदिर का क्षेत्रफल 17 एकड़ से अधिक होगा। यह परियोजना खास तौर पर Durga Puja को यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा मिलने के सम्मान में विकसित की जा रही है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां पूरे साल मां दुर्गा की पूजा होगी और 365 दिन दुर्गा पूजा जैसा माहौल बना रहेगा। 54 मीटर ऊंचा यह मंदिर 1,008 स्तंभों पर आधारित होगा और परिसर में एक सांस्कृतिक संग्रहालय भी तैयार किया जाएगा, जहां बंगाल की लोक कला और हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया जाएगा।

तीसरी परियोजना Digha में स्थित जगन्नाथ मंदिर है, जो पहले ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। यह मंदिर Jagannath Temple Puri की तर्ज पर बनाया गया है और भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा को समर्पित है। लगभग 22 एकड़ में फैले इस मंदिर के निर्माण पर 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसकी ऊंचाई करीब 65 मीटर है और इसे राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों से तैयार किया गया है। मंदिर में चार भव्य प्रवेश द्वार—सिंह द्वार, व्याघ्र द्वार, हस्ती द्वार और अश्व द्वार—बनाए गए हैं, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।

इन तीनों परियोजनाओं के जरिए पश्चिम बंगाल सरकार राज्य को एक बड़े धार्मिक पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। जहां एक ओर ये मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनेंगे, वहीं दूसरी ओर स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यटन उद्योग को भी इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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