April 17, 2026

महाराष्ट्र को धोखा देने का पाप गंगा भी नहीं धो सकती” – ठाकरे की सियासी चुनौती

महाराष्ट्र की राजनीति में यह सवाल इन दिनों गरमा गया है। एक तरफ महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाते मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनकी टीम, तो दूसरी तरफ शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का सीधा हमला— “गंगा में कितनी भी बार डुबकी लगाओ, विश्वासघात का दाग नहीं धुलेगा!”

दरअसल, महाराष्ट्र में शिवसेना के भीतर हुई बगावत के बाद से उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच की राजनीतिक लड़ाई किसी से छिपी नहीं है। दोनों नेता आए दिन एक-दूसरे पर तीखे हमले बोलते हैं, लेकिन इस बार जंग हिंदुत्व और आस्था के मुद्दे पर छिड़ी है।

हफ्ते की शुरुआत में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपने समर्थक विधायकों के साथ प्रयागराज में महाकुंभ में पहुंचे। संगम में आस्था की डुबकी लगाई और हिंदुत्व के अपने दावे को और पुख्ता करने की कोशिश की। मीडिया से बातचीत में शिंदे ने एक बयान दिया, जो इस सियासी लड़ाई को और भड़का गया।

शिंदे ने कहा, “जो लोग महाकुंभ में नहीं आए, उनसे पूछा जाना चाहिए कि वे क्यों नहीं आए। वे कहते तो हैं कि वे हिंदू हैं, लेकिन आस्था दिखाने से कतराते हैं।” शिंदे का यह बयान सीधा उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष था। उनके इसी बयान पर अब उद्धव ने करारा जवाब दिया है।

मराठी भाषा गौरव दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने बिना नाम लिए शिंदे पर हमला किया। उन्होंने कहा,”गंगा में डुबकी लगाने से क्या पाप धुल जाते हैं? महाराष्ट्र को धोखा देने का पाप गंगा में कई बार नहाने से भी नहीं धुलेगा!”उन्होंने आगे कहा, “मैं गंगा का सम्मान करता हूं, लेकिन इसमें डुबकी लगाने का क्या फायदा, जब आप अपने कर्मों से ही पवित्र नहीं हैं?”

ठाकरे का यह बयान साफ दिखाता है कि वे शिंदे को अब भी “गद्दार” मानते हैं और उनकी हिंदुत्व की राजनीति को खोखला बता रहे हैं।उद्धव ठाकरे ने इस मौके पर सिर्फ शिंदे को ही नहीं, बल्कि बीजेपी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “बीजेपी को भगवान राम का महत्व सिखाने की जरूरत नहीं है।” इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश उन लोगों के हाथों में है, “जिनका स्वतंत्रता संग्राम से कोई लेना-देना नहीं था” और राज्य ऐसे नेताओं के हाथों में चला गया है, “जिनका संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन से कोई संबंध नहीं था।”

यह राजनीतिक टकराव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें 2022 की उस बगावत में हैं जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शिवसेना के 39 विधायकों को अपने साथ मिला लिया था। उद्धव गुट ने शिंदे और उनके समर्थकों पर 50 करोड़ रुपये में बिकने का आरोप लगाया था, जबकि शिंदे ने दावा किया कि वे बालासाहेब ठाकरे के असली हिंदुत्व के रास्ते पर चल रहे हैं।

अब सवाल यह है— क्या हिंदुत्व की इस सियासत में जनता इन नेताओं की बातों को किस नजरिए से देख रही है? क्या गंगा स्नान राजनीतिक पाप धोने के लिए काफी है, या फिर जनता ही असली फैसला सुनाएगी?

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