कुंभ मेले में बिछड़े बुजुर्ग की एक महीने बाद सकुशल घर वापसी, परिवार में खुशी की लहर
मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एक बुजुर्ग की बीते एक महीने के बाद सकुशल घर वापसी ने पूरे परिवार को खुशी से झूमने का मौका दिया है। यह घटना कुंभ मेले के दौरान हुई, जब एक दंपति अपने परिवार के साथ स्नान के लिए प्रयागराज गया था। हालांकि, मेला भीड़-भाड़ से भरा हुआ था और इस दौरान बुजुर्ग विद्याराम शर्मा अपनी पत्नी से बिछड़ गए थे। लगभग एक महीने तक इधर-उधर भटकने के बाद गाजीपुर पुलिस की मदद से वह अपने घर लौट पाए।
कुंभ मेला: बिछड़े दंपति का दुखद अनुभव
भिंड जिले के गोहद थाना क्षेत्र के बिरखड़ी गांव निवासी 70 वर्षीय विद्याराम शर्मा अपनी पत्नी यशोदा देवी के साथ 14 फरवरी को महाकुंभ में स्नान के लिए प्रयागराज गए थे। उनके साथ गांव के और भी लोग थे, जिन्होंने एक बस में बैठकर यात्रा की थी। 17 फरवरी को जब कुंभ मेला अपनी चरम भीड़ तक पहुंचा, तो विद्याराम शर्मा अपनी पत्नी से बिछड़ गए। उनके पास उनका सारा सामान और पैसे यशोदा देवी के पास थे, जिससे विद्याराम को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
एक महीने की तलाश, उम्मीदों का टूटना
बुजुर्ग विद्याराम के परिजनों ने काफी कोशिश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पाया। एक महीने तक तलाश के बावजूद जब कोई खबर नहीं मिली, तो परिजनों ने उन्हें मृत मान लिया और वापसी की उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।
गाजीपुर में मिला नया सहारा
विद्याराम शर्मा को बाद में प्रयागराज से मुंबई जाने वाली गलत ट्रेन में बैठने के बाद आठ दिनों तक बिना कुछ खाए-पिए भटकते हुए गाजीपुर के सैदपुर में एक ट्रक चालक ने उतार दिया। यहां पर एक युवक रवि सोनकर ने उनकी मदद की और उन्हें गाजीपुर कोतवाली ले गया। कोतवाली में पुलिस ने उनकी पहचान और परिजनों से संपर्क करने का प्रयास शुरू किया।
पुलिस की मेहनत रंग लाई: परिजनों से वीडियो कॉल
गाजीपुर पुलिस की अथक कोशिशों के बाद, आखिरकार विद्याराम के परिवार से संपर्क हो गया। एक वीडियो कॉल के माध्यम से जब परिजनों ने अपने खोए हुए बुजुर्ग को देखा, तो दोनों तरफ भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। विद्याराम ने कोतवाली के प्रभारी को गले लगाकर उनका धन्यवाद किया और उनकी मदद के लिए आभार व्यक्त किया।
घर वापसी का जश्न: परिवार में खुशी का माहौल
विद्याराम के परिजन तुरंत गाजीपुर पहुंचे और उन्हें अपने साथ घर ले आए। घर में लौटने पर जश्न का माहौल बन गया। उनकी बेटी दरवाजे पर खड़ी होकर अपने पिता की राह देख रही थी। जब उसने अपने पिता को देखा, तो वह भावुक हो गई और उनसे लिपटकर रो पड़ी। पूरे परिवार ने उनकी आरती उतारी, पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटी। घर में यह खुशियों का पल एक महीना लंबी यात्रा की थकान को भुला देने वाला था।
विद्याराम शर्मा की सकुशल घर वापसी ने न सिर्फ उनके परिवार को राहत दी, बल्कि यह कहानी यह भी साबित करती है कि पुलिस और समाज के सहयोग से कभी भी उम्मीद खत्म नहीं होनी चाहिए।
Share this content:
