पॉक्सो एक्ट के तहत यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ रची गई साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया है कि आशुतोष महाराज ने उन्हें फंसाने के लिए एक नाबालिग लड़की के परिवार से संपर्क कर झूठे आरोप लगाने के लिए उकसाया। अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, यह पूरा मामला उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने और उन्हें बदनाम करने की कोशिश का हिस्सा है।
मीडिया से बातचीत में अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि सहारनपुर से एक परिवार उनके पास आया था, जिसने कथित तौर पर यह खुलासा किया कि एक व्यक्ति ने उनकी नाबालिग बेटी का नाम लेकर उनके खिलाफ आरोप लगाने के लिए कहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार को बेटी की शादी के लिए आर्थिक सहायता देने और किसी प्रकार की परेशानी न होने का आश्वासन देकर झूठा आरोप लगाने के लिए तैयार करने की कोशिश की गई। इस मामले में एक कथित पीड़ित ने भी मीडिया के सामने दावा किया कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य को फंसाने के उद्देश्य से परिवार से संपर्क किया था।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों में कहा गया है कि जब स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने प्रारंभिक शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की, तब विशेष न्यायाधीश से संपर्क किया गया। आवेदन में दावा किया गया कि प्रयागराज में वर्ष 2025-26 के माघ मेले के दौरान दो नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी। शिकायत के अनुसार, पीड़ित ‘ए’ की उम्र लगभग 14 वर्ष और पीड़ित ‘बी’ की उम्र करीब 17 वर्ष 6 महीने बताई गई है। आरोप है कि धार्मिक सेवा और शिष्यत्व की आड़ में इन घटनाओं को अंजाम दिया गया, जिसकी जानकारी पीड़ितों ने स्वयं याचिकाकर्ता को दी थी।
मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित विशेष पॉक्सो अदालत ने झूंसी पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज आरोपों की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत के आदेश के बाद भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने और जांच आगे बढ़ाने को कहा गया है।
याचिकाकर्ता द्वारा दायर आवेदन में बीएनएस की धारा 69, 74, 75, 76, 79 और 109 सहित यौन उत्पीड़न से संबंधित प्रावधानों के साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 3, 5, 9 और 17 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए पुलिस को मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। फिलहाल इस पूरे प्रकरण में एक ओर जहां शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद खुद को साजिश का शिकार बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपों की सत्यता को लेकर जांच एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया के तहत मामले की पड़ताल कर रही हैं।
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