लखनऊ: खतरनाक चाइनीज मांझे पर कानून बनाने का हाई कोर्ट का आदेश, सरकार को सख्त चेतावनी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खतरनाक चाइनीज मांझे के बढ़ते प्रयोग और उससे हो रही लगातार दुर्घटनाओं पर हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि केवल सरकारी आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लेड-कोटेड और नायलॉन जैसे खतरनाक मांझों के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रभावी रोक के लिए ठोस कानून बनाया जाना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ऐसे मांझों का उपयोग जारी रहा तो पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया जा सकता है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि फरवरी महीने में ही करीब दस लोग चाइनीज मांझे से घायल हुए या उनकी मौत हो गई। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि पहले ही प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन कोर्ट ने माना कि केवल आदेश पर्याप्त नहीं, बल्कि सख्त और स्पष्ट कानूनी प्रावधान जरूरी हैं। अदालत ने सरकार से नए शपथ पत्र के जरिए यह बताने को कहा है कि वह इस समस्या से निपटने के लिए कौन-से कानूनी कदम प्रस्तावित कर रही है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जिम्मेदारी केवल मांझा बनाने या बेचने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए जो अपने कर्तव्यों के पालन में विफल रहते हैं। अदालत ने स्थायी निगरानी तंत्र बनाने और नियमित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि हर बार हादसा होने के बाद ही प्रशासन सक्रिय न हो।
लखनऊ में हाल के दिनों में मांझे से जुड़े हादसों में तेजी आई है। पिछले नौ दिनों में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि आठ से अधिक लोग घायल हुए हैं। हैदरगंज ओवरब्रिज पर गर्दन कटने से 33 वर्षीय मोहम्मद शोएब की जान चली गई, जबकि नाका फ्लाईओवर, कुड़ियाघाट, गोमतीनगर और शहीदपथ जैसे इलाकों में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। फ्लाईओवर और मुख्य सड़कों पर बाइक सवार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। हाई कोर्ट की सख्ती के बाद अब सरकार पर प्रभावी कानून लाने का दबाव बढ़ गया है।
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