राष्ट्रीय हिंदू रक्षा परिषद की ओर से समाज में व्याप्त जातीय विषमता, ऊँच-नीच, जात-पात, छुआछूत और आपसी भेदभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से सामाजिक समरसता गोष्ठी एवं समरसता सहभोज का भव्य आयोजन 25 जनवरी 2026 को राजधानी लखनऊ के गोमती तट स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर परिसर में संपन्न हुआ। इस आयोजन में बड़ी संख्या में सनातनी समाज के लोग, संत-महात्मा, संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मूल उद्देश्य सनातन धर्म की मूल भावना “वसुधैव कुटुंबकम्” को सशक्त करते हुए समाज में समानता, एकता और भाईचारे की स्थापना करना रहा। गोष्ठी में राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद की राष्ट्रीय, प्रदेश, मंडल एवं जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी और हजारों की संख्या में सनातनी भाई-बहन शामिल हुए। मंच से वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि सनातन धर्म की परंपरा समाज को जोड़ने की रही है, न कि विभाजित करने की।
गोष्ठी के दौरान संतों एवं प्रमुख वक्ताओं ने जातीय भेदभाव को समाप्त कर समाज को एक सूत्र में बाँधने का आह्वान किया। संत-महात्माओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन धर्म करुणा, समरसता और समानता पर आधारित जीवन-दृष्टि है, जिसमें किसी भी प्रकार के भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि वह संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर एकजुट हो।
गोष्ठी के उपरांत समरसता सहभोज का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया। इस सहभोज के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सामाजिक समरसता केवल विचारों तक सीमित नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारना आवश्यक है। पूरे आयोजन स्थल पर समरसता और एकता का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार सनातनी ने कहा कि सनातन समाज को अपनी मूल पहचान पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने सभी सनातनियों से अपील की कि वे अपने नाम के आगे लगाए गए जाति-सूचक शब्दों को हटाकर केवल “सनातनी” पहचान को अपनाएँ। उन्होंने कहा कि जातीय विभाजन राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित है, जबकि हमारे धर्मग्रंथों, पुराणों और महापुरुषों ने कभी भी जातीय भेदभाव को बढ़ावा नहीं दिया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा कि आज कुछ स्वार्थी तत्व समाज में जातीय तनाव पैदा कर अपनी राजनीति साध रहे हैं, जिससे सनातन समाज कमजोर हो रहा है। यदि सनातन समाज एकजुट, संगठित और संकल्पित हो जाए, तो देश में केवल एक ही पहचान बचेगी—सनातनी—और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय महासचिव मुकेश सनातनी ने कहा कि सामाजिक समरसता की यह मुहिम देशभर में प्रदेश, नगर, वार्ड और ग्राम सभा स्तर तक पहुँचाई जाएगी। संगठन के कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जातीय भेदभाव समाप्त करने के लिए जागरूक करेंगे और समाज को एकजुट करने का कार्य करेंगे।
इस गरिमामय आयोजन में विशिष्ट अतिथियों एवं प्रमुख वक्ताओं के रूप में अंतरराष्ट्रीय महामंडलेश्वर बाबा महादेव (हनुमानगढ़ी, नैमिषारण्य), श्री यशवेंद्र विक्रम सिंह (पयागपुर स्टेट), कौशलेंद्र नाथ, आचार्य संजय वैदिक जी, संजय दास बाबा जी, श्री बजरंग दास जी, गुलाब चीन, महंत हररामदास सहित अनेक संत, साधु और विचारक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार सनातनी, राष्ट्रीय महासचिव मुकेश सनातनी, साधना सनातनी (राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष), विवेक सनातनी (राष्ट्रीय युवा शक्ति रक्षा सह संयोजक), ज्योति कुमार सनातनी (प्रदेश उपाध्यक्ष), कुलदीप सनातनी (प्रदेश संयोजक), प्रवेश सनातनी (प्रदेश उपाध्यक्ष), भवानी प्रसाद सनातनी (प्रदेश विशेष संपर्क प्रमुख), हिमांशु सनातनी (जिला उपाध्यक्ष), अनिल सनातनी (जिला सह संयोजक), पूजा सनातनी (निजी सचिव), विजय सनातनी (अयोध्या मंडल अध्यक्ष), संदीप सनातनी (अयोध्या मंडल उपाध्यक्ष), राज कुमार सनातनी, सुनील सनातनी, दशरथ सनातनी, रामेंद्र सनातनी, नान बाबू सनातनी, अभय सनातनी, राजेश सिंह सनातनी, संजय कुमार सनातनी, नरेश कुमार सनातनी, गुरु दयाल सनातनी, अजीत प्रताप सनातनी, राजवीर सनातनी, सरिता सनातनी सहित राष्ट्रीय, प्रदेश, मंडल और जिला कार्यकारिणी के अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में समाज को विभाजित करने वाली शक्तियाँ सक्रिय हैं। ऐसे समय में सनातन धर्म की समरस परंपरा को जन-जन तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है। यह आयोजन उसी दिशा में एक मजबूत और सार्थक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
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