उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। जांच एजेंसी की टीम ने शहर के एक आवासीय इलाके में चल रहे अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारकर इसे मौके पर ही ध्वस्त कर दिया। यह कॉल सेंटर लंबे समय से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर उनसे ऑनलाइन ठगी कर रहा था। कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया, जो पिछले कई महीनों से जांच एजेंसियों की पकड़ से बचता फिर रहा था।
मामले की शुरुआत तब हुई जब विदेशी नागरिकों से लगातार शिकायतें मिलनी शुरू हुईं कि भारत से संचालित कुछ कॉल सेंटर खुद को अमेरिकी एजेंसी या टेक्निकल सपोर्ट बताकर उनसे भारी रकम वसूल रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एक विस्तृत जांच शुरू की गई, जिसके तहत कई राज्यों में छापेमारी की गई। शुरुआती चरण में पुणे, हैदराबाद और विशाखापत्तनम में चार फर्जी कॉल सेंटरों का पर्दाफाश हुआ था। सभी केंद्रों के संचालन में लखनऊ निवासी आरोपी की भूमिका सामने आई, जिसके बाद उसकी तलाश तेज कर दी गई।
लखनऊ में की गई ताज़ा कार्रवाई सबसे बड़ा सुराग साबित हुई। टीम ने जब आरोपी के आवास पर दबिश दी, तो वहां से 14 लाख रुपये नकद, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल डिवाइस और ऐसे दस्तावेज बरामद हुए जो साइबर ठगी से जुड़े लेन-देन और परिचालन की पुष्टि करते थे। बरामद किए गए डेटा में विदेशी नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी, फर्जी टेक्निकल सपोर्ट स्क्रिप्ट और धन हस्तांतरण से जुड़े सबूत शामिल थे, जिनका उपयोग गिरोह ठगी में करता था।
इसके बाद एक और ठिकाने की पहचान हुई, जहां आरोपी द्वारा संचालित दूसरा अवैध कॉल सेंटर मिला। यह कॉल सेंटर भी अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर वही पुरानी स्कीमों के ज़रिये ठगी कर रहा था। यहां से कुल 52 लैपटॉप और कई डिजिटल रिकॉर्ड बरामद हुए। तकनीकी विश्लेषण में पता चला कि इन डिवाइसों का उपयोग कॉलिंग, रिकॉर्डिंग, स्क्रीन-शेयरिंग और पीड़ितों को डराकर पैसे निकलवाने की प्रक्रिया में किया जाता था। डिजिटल साक्ष्य इस नेटवर्क की व्यापकता और संगठित ढांचे की ओर संकेत देते हैं।
पूरी कार्रवाई के बाद जांच एजेंसी ने बताया कि गिरोह विदेशों में बैठे हमदर्दों के साथ मिलकर एक पूरा इंटरनेशनल फ्रॉड मॉड्यूल चला रहा था। यह मॉड्यूल अमेरिकी नागरिकों को टेक्निकल सपोर्ट, टैक्स विवाद या बैंकिंग धोखाधड़ी जैसी फर्जी कहानियों के नाम पर डरा-धमकाकर पैसे लेने की रणनीति अपनाता था। फिलहाल बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच चल रही है, जिससे गिरोह से जुड़े और लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। मामला बड़ा होने के कारण आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है।
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