April 17, 2026

लेबनान में हिजबुल्लाह पर कार्रवाई से सेना का इनकार, अमेरिकी दबाव नाकाम

हिजबुल्लाह को निशस्त्र करने की अमेरिकी कोशिशें फिलहाल विफल साबित हो रही हैं। वाशिंगटन की ओर से लगातार दबाव डाला जा रहा है कि लेबनानी सेना हिजबुल्लाह को हथियार डालने पर मजबूर करे, लेकिन सेना ने साफ कर दिया है कि वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे देश की शांति और स्थिरता खतरे में पड़े।

17 अगस्त को अमेरिकी प्रतिनिधि थॉमस बैरक और मॉर्गन ऑर्टेगस ने बेरूत का दौरा किया और राष्ट्रपति जोसेफ औन, प्रधानमंत्री नवाफ सलाम व संसद अध्यक्ष नबीह बेरी से मुलाकात की। इस दौरान सेना प्रमुख जनरल रोडोल्फ हेकल से भी सीधा सवाल किया गया कि क्या सेना हिजबुल्लाह को मजबूर कर सकती है, लेकिन उनका जवाब स्पष्ट था—“सेना शांति के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगी।”

लेबनानी सरकार खुद भी असमंजस की स्थिति में है। हाल ही में सलाम सरकार ने एक रोडमैप पास किया था जिसके तहत अगले साल तक हिजबुल्लाह को निशस्त्र करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब सरकार पीछे हटती दिख रही है। लेबनानी अधिकारियों ने अमेरिकी दूतों से साफ कर दिया कि किसी भी कार्रवाई के लिए इजराइल को भी समानांतर कदम उठाने होंगे। वहीं, शिया समुदाय ने खुला ऐलान किया है कि वे अपने हथियारों की रक्षा करेंगे, चाहे इसके लिए कर्बला जैसी जंग क्यों न लड़नी पड़े।

स्थिति और गंभीर तब हो गई जब लेबनान के जाफरी मुफ्ती अहमद कबालान ने भी राष्ट्रपति को चेतावनी दी कि हिजबुल्लाह को कमजोर करने की किसी भी कोशिश से देश और बड़े संकट में फंस जाएगा। उनका कहना है कि हिजबुल्लाह के हथियार सेना के साथ मिलकर लेबनान की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। दूसरी ओर, इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी चौकियों को और मजबूत कर लिया है और कब्जाए गए इलाकों से पीछे हटने से इनकार कर दिया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिकी दबाव इसलिए भी असरदार नहीं हो रहा क्योंकि लेबनानी नेतृत्व को वाशिंगटन के वादों पर भरोसा नहीं है। बीते साल अमेरिका शांति की बातें कर रहा था, लेकिन इसी दौरान हिजबुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर फौआद शुकर की हत्या हुई। हाल ही में संगठन के प्रमुख सैय्यद हसन नसरल्लाह की हत्या ने भी अविश्वास को और गहरा कर दिया। ऐसे में लेबनान में अमेरिका का प्लान लगातार फिसलता नजर आ रहा है।

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