LDA के 8 कर्मचारियों पर विजिलेंस जांच, दो संविदाकर्मियों की सेवा समाप्त—फर्जी रजिस्ट्री गैंग से जुड़े तार
लखनऊ: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में फर्जी रजिस्ट्री घोटाले की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। एसटीएफ द्वारा फर्जी रजिस्ट्री गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब एलडीए के कई कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एलडीए उपाध्यक्ष (VC) प्रथमेश कुमार ने आठ कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की, जिसे शासन ने मंजूरी दे दी है।
कैसे खुला फर्जी रजिस्ट्री घोटाले का मामला?
एसटीएफ की छानबीन के दौरान यह सामने आया कि फर्जी रजिस्ट्री गैंग वर्षों से खाली पड़े एलडीए के आवंटित प्लॉटों की फर्जी रजिस्ट्री कराकर लोगों को ठग रहा था। इस रैकेट के संचालन में एलडीए के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की बात भी सामने आई। शुरुआती जांच में शक के घेरे में आए आठ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद विजिलेंस जांच की सिफारिश की गई।
किन कर्मचारियों पर गिर रही है गाज?
जांच के दायरे में आए इन आठ कर्मचारियों में से दो कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले चुके हैं, जबकि तीन कर्मचारी लंबे समय से एलडीए की संपत्ति सेल में तैनात थे। इसके अलावा, तीन अन्य कम्प्यूटर ऑपरेटर पद पर कार्यरत थे, जिनकी भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने पुष्टि की है कि इन कर्मचारियों पर वर्षों से खाली पड़े आवंटित प्लॉटों की जानकारी फर्जी रजिस्ट्री गैंग को उपलब्ध कराने का आरोप है।
संविदाकर्मियों की सेवा समाप्त, विजिलेंस जांच जल्द शुरू होगी
एलडीए प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से दो संविदाकर्मियों की सेवा समाप्त कर दी है, जबकि अन्य छह कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। विजिलेंस टीम जल्द ही इन कर्मचारियों के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू कर सकती है। इसके अलावा, एलडीए के भीतर भी इन कर्मचारियों पर विभागीय जांच जारी है।
फर्जी रजिस्ट्री गैंग की करतूतों का खुलासा
गिरफ्तार किए गए फर्जी रजिस्ट्री गैंग के सदस्यों ने खुलासा किया कि वे लंबे समय से एलडीए के अंदरूनी सूत्रों की मदद से खाली पड़े आवंटित प्लॉटों का डेटा जुटाते थे। इसके बाद, फर्जी दस्तावेज तैयार कर प्लॉटों को अनजान लोगों के नाम बेच दिया जाता था। कई मामलों में पीड़ितों को तब पता चला जब वे अपने खरीदे गए प्लॉट पर कब्जा लेने पहुंचे और उन्हें असलियत का पता चला।
आगे क्या?
एलडीए के अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है और जल्द ही इसमें कई और खुलासे हो सकते हैं। यदि इन आठ कर्मचारियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। विजिलेंस टीम के अधिकारी अब इन कर्मचारियों के बैंक खातों, संपत्तियों और कॉल डिटेल्स की भी जांच करने की तैयारी में हैं ताकि उनके और फर्जी रजिस्ट्री गैंग के बीच संबंधों को स्पष्ट किया जा सके।
एलडीए के इस मामले ने पूरे लखनऊ में हलचल मचा दी है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके और जनता का विश्वास बहाल किया जा सके।
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