IND vs ENG: केएल राहुल की जुझारू पारी ने जीता कुंबले का दिल, बोले – ऐसी बैटिंग हर कोई नहीं कर सकता
लॉर्ड्स टेस्ट के दूसरे दिन जब एक छोर से विकेट गिर रहे थे और इंग्लैंड के गेंदबाज़ जोफ्रा आर्चर की गेंदें आग उगल रही थीं, तब टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज़ केएल राहुल ने एक छोर को मजबूती से थामे रखा। उन्होंने न सिर्फ शानदार अर्धशतक जड़ा, बल्कि अपनी तकनीक, अनुशासन और धैर्य से सभी को प्रभावित किया।
राहुल की इस पारी की तारीफ भारत के पूर्व कप्तान और महान स्पिनर अनिल कुंबले ने भी खुले दिल से की। उन्होंने कहा, “जोफ्रा आर्चर की गति, उछाल और स्विंग के सामने राहुल का संतुलन और नियंत्रण बेहतरीन था। उन्होंने धैर्य के साथ बल्लेबाज़ी की और इंग्लैंड के हर गेंदबाज़ का आत्मविश्वास से सामना किया।”
दूसरे दिन की स्थिति और राहुल की अहम भूमिका
दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक केएल राहुल 53 रन बनाकर नाबाद थे। भारत ने 3 विकेट खोकर 145 रन बनाए थे और अब भी इंग्लैंड के पहली पारी के स्कोर 387 से 242 रन पीछे है। टीम ने यशस्वी जायसवाल (13), करुण नायर (40) और कप्तान शुभमन गिल (16) के विकेट गंवा दिए थे। ऐसे में राहुल की टिक कर खेली गई यह पारी बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।
यह इस इंग्लैंड दौरे पर राहुल का दूसरा अर्धशतक है, जबकि पहले टेस्ट में वह शतक भी जड़ चुके हैं। साथ ही यह उनके टेस्ट करियर का 24वां फिफ्टी-प्लस स्कोर रहा, जिससे वह टेस्ट में सबसे ज्यादा 50+ स्कोर बनाने वाले भारतीय ओपनरों की सूची में पांचवें स्थान पर आ गए हैं। उनसे आगे अब सिर्फ सुनील गावस्कर (75), वीरेंद्र सहवाग (51), गौतम गंभीर (31) और मुरली विजय (27) हैं।
कुंबले ने क्यों बताया इसे ‘खास पारी’
कुंबले ने राहुल की मानसिकता की सराहना करते हुए कहा, “ये सिर्फ रन नहीं थे, यह एक ऐसा उदाहरण था जो युवा बल्लेबाजों को सीखने को मिलेगा कि मुश्किल हालात में कैसे टिककर खेला जाता है। राहुल पूरे वक्त काबू में थे और हर गेंद को सोच-समझकर खेला। यह पारी दिखाती है कि वह अब कितने परिपक्व खिलाड़ी बन चुके हैं।”
लॉर्ड्स में जीत की जंग जारी
भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मैचों की टेस्ट सीरीज फिलहाल 1-1 की बराबरी पर है। लीड्स टेस्ट इंग्लैंड ने जीता था, जबकि एजबेस्टन टेस्ट में भारत ने शानदार वापसी की थी। अब लॉर्ड्स में दोनों टीमें सीरीज में बढ़त लेने की कोशिश में हैं और केएल राहुल की यह पारी भारत के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
राहुल जिस आत्मविश्वास और मजबूती से खेल रहे हैं, उससे यही संकेत मिल रहा है कि भारतीय बल्लेबाज़ी क्रम एक बार फिर उन्हीं पर निर्भर रहेगा — खासकर तब, जब टीम बड़े लक्ष्य की ओर देख रही हो।
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