दश में बढ़ती शहरी आबादी और आम लोगों के लिए घर खरीदना लगातार मुश्किल होते जाने के बीच नीति आयोग ने किफायती आवास को लेकर एक अहम रोडमैप तैयार किया है। आयोग का मानना है कि आने वाले वर्षों में शहरी क्षेत्रों पर जनसंख्या का दबाव तेजी से बढ़ेगा। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक भारत की शहरी आबादी 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो करीब 85 करोड़ होगी। ऐसे में सस्ते और किफायती घरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, जिसे देखते हुए आयोग ने डेवलपर्स और घर खरीदारों—दोनों के लिए वित्तीय राहत का प्रस्ताव रखा है।
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि किफायती आवास परियोजनाओं में शामिल डेवलपर्स को फिर से 100 प्रतिशत टैक्स छूट दी जानी चाहिए। पहले यह छूट आयकर अधिनियम की धारा 80-IBA के तहत जून 2016 से मार्च 2022 तक लागू थी। आयोग का कहना है कि इस प्रावधान को दोबारा लागू करने से निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी, परियोजनाओं का निर्माण तेज होगा और हाउसिंग सेक्टर में निवेश का माहौल मजबूत बनेगा। इससे सीधे तौर पर सस्ते घरों की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि किफायती आवास की कमी सिर्फ जमीन की ऊंची कीमतों की वजह से नहीं है, बल्कि होम लोन और फंडिंग से जुड़ी कमजोर व्यवस्थाएं भी इसकी बड़ी वजह हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REITs से जुड़े निवेशकों को पूंजीगत लाभ और किराये से होने वाली आय पर टैक्स छूट देने का सुझाव दिया है, ताकि सस्ते घरों के लिए पूंजी जुटाना आसान हो और फंडिंग की लागत कम की जा सके।
घर खरीदने वालों को राहत देने के लिए आयोग ने क्रेडिट रिस्क गारंटी फंड योजना के तहत लोन की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। इससे कम आय और मध्यम आय वर्ग के लोगों को सस्ते घर खरीदने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही नेशनल हाउसिंग बैंक को टैक्स-फ्री बॉन्ड जारी करने की अनुमति देने की सिफारिश भी की गई है, ताकि ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए किफायती दरों पर फंड उपलब्ध कराया जा सके।
नीति आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि यदि किसी जमीन का उपयोग सिर्फ किफायती आवास के लिए किया जा रहा हो तो उस पर लगने वाले भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क को माफ किया जाए। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 और अन्य किफायती आवास परियोजनाओं के तहत बनने वाले घरों पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट देने की बात कही गई है। आयोग का दावा है कि इन सभी कदमों से सस्ते घरों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आएगी और आम लोगों के लिए अपना घर खरीदना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकेगा।
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