May 1, 2026

कतर से तुर्की और जॉर्डन तक: कब-कब इजराइल को झुककर मांगनी पड़ी माफी

नेतन्याहू पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, कई बार मुस्लिम देशों से करना पड़ा खेद प्रकट

मध्य-पूर्व की राजनीति अपने अनिश्चित माहौल और लगातार बदलते समीकरणों के लिए जानी जाती है। इस क्षेत्र में इजराइल हमेशा से ही विवादों और तनाव के केंद्र में रहा है। पड़ोसी मुस्लिम देशों के साथ उसके रिश्ते कई बार टकराव की वजह से बिगड़े और कभी-कभी हालात ऐसे बने जब दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में गिने जाने वाले इजराइल को झुकना पड़ा। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कई बार मुस्लिम देशों से माफी मांगनी पड़ी है। ताजा मामला कतर का है, लेकिन इससे पहले तुर्की और जॉर्डन से भी इजराइल को औपचारिक तौर पर खेद जताना पड़ा।

दोहा हमला और कतर से माफी

9 सितंबर को इजराइली सेना ने कतर की राजधानी दोहा में हमास नेता खलील अल-हय्या को निशाना बनाकर हमला किया। हालांकि अल-हय्या बच निकले, लेकिन इस हमले में छह लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक कतर का अधिकारी भी शामिल था। इस घटना के बाद कतर बेहद नाराज हुआ और मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी असहमति जताई। दबाव बढ़ने के बाद नेतन्याहू ने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी को फोन कर औपचारिक माफी मांगी। यह कदम स्पष्ट करता है कि इजराइल को कभी-कभी अपनी सैन्य कार्रवाइयों पर वैश्विक दबाव में झुकना पड़ता है।

तुर्की से 2010 में माफी

कतर से पहले, 2010 में तुर्की के साथ इजराइल का विवाद बड़ा मुद्दा बना था। मामला मावी मरमारा नाम के जहाज का था, जो गाजा की नाकेबंदी तोड़कर राहत सामग्री ले जा रहा था। इजराइली सेना ने उस पर हमला किया, जिसमें नौ तुर्की नागरिकों की मौत हो गई। इस घटना से दोनों देशों के रिश्ते बुरी तरह बिगड़ गए। आखिरकार 2013 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पहल पर नेतन्याहू को तुर्की के प्रधानमंत्री रेचेप तैयप एर्दोआन को फोन कर खेद जताना पड़ा और माफी मांगनी पड़ी।

जॉर्डन से 1997 में माफी

1997 में नेतन्याहू के कार्यकाल के दौरान मोसाद एजेंट्स ने जॉर्डन की राजधानी अम्मान में हमास नेता खालिद मशाल की हत्या की कोशिश की थी। एजेंट्स ने उन्हें जहर दिया, लेकिन पकड़े गए। मशाल की हालत गंभीर हो गई और डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि अगर जल्द एंटीडोट नहीं मिला तो उनकी मौत हो जाएगी। जॉर्डन के राजा हुसैन ने इजराइल को धमकी दी कि अगर रात तक एंटीडोट नहीं भेजा गया तो शांति समझौता तोड़ दिया जाएगा और एजेंट्स को फांसी दी जाएगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के दबाव के बाद नेतन्याहू को झुकना पड़ा और जहर का एंटीडोट जॉर्डन भेजना पड़ा। इससे मशाल की जान बच गई। बाद में नेतन्याहू को खुद जॉर्डन जाकर राजा से माफी मांगनी पड़ी। यह पहली बार था जब इजराइल ने अपने दुश्मन को मरने से बचाया और औपचारिक खेद जताया।

निष्कर्ष

कतर, तुर्की और जॉर्डन से माफी मांगने की घटनाएं बताती हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ताकतवर देश भी हमेशा अपनी शर्तों पर नहीं चल सकते। कभी-कभी दबाव और रिश्तों को बनाए रखने की मजबूरी उन्हें झुकने पर मजबूर कर देती है। नेतन्याहू के कार्यकाल में ऐसे कई मौके आए जब इजराइल को अपनी नीतियों पर सफाई देनी पड़ी और मुस्लिम देशों से माफी मांगनी पड़ी।

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