April 20, 2026

कश्मीर पर पाकिस्तान के बयान पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया, विदेश मंत्रालय ने किया करारा पलटवार

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर द्वारा कश्मीर को “इस्लामाबाद की गले की नस” बताए जाने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने इस बयान को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि पाकिस्तान का कश्मीर से एकमात्र संबंध सिर्फ इतना है कि वह अवैध रूप से कब्जा किए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करे। प्रवक्ता ने पाकिस्तान के दावे पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि कोई विदेशी चीज भला किसी की “गले की नस” कैसे हो सकती है।

जनरल असीम मुनीर का यह बयान उनके एक वीडियो संदेश के दौरान सामने आया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी युवाओं से देश की ‘कहानी’ याद रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की नींव दो-राष्ट्र सिद्धांत पर रखी गई थी, क्योंकि मुसलमानों और हिंदुओं के विचार, धर्म और परंपराएं अलग थीं। उनका कहना था कि पाकिस्तान की हर पीढ़ी ने देश की रक्षा के लिए बलिदान दिया है और अब आने वाली पीढ़ियों को भी अपने इतिहास और असलियत को समझना चाहिए। हालांकि इस भाषण के जरिए वे पाकिस्तान में राष्ट्रवादी भावना को मजबूत करना चाहते थे, लेकिन कश्मीर पर दिए गए उनके बयान ने भारत में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी।

इसके अलावा बलूचिस्तान और आतंकवाद को लेकर भी जनरल असीम मुनीर ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दावा किया कि आतंकवादियों की दस पीढ़ियां भी पाकिस्तान और बलूचिस्तान को नुकसान नहीं पहुंचा सकतीं। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना पूरी मजबूती से आतंकवाद के खिलाफ खड़ी है और देश की एकता को कोई खतरा नहीं है।

वहीं, भारत ने पाकिस्तान पर एक बार फिर आतंकवाद को लेकर निशाना साधा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान आज भी आतंकवाद का गढ़ बना हुआ है। हाल ही में तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान 26/11 जैसे हमलों के दोषियों को पनाह देता रहा है। मंत्रालय ने पाकिस्तान के रवैये को “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि वह अब तक 26/11 हमले के दोषियों को सजा दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है। भारत ने दोहराया कि पाकिस्तान को अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए और आतंकवाद को बढ़ावा देने की अपनी नीतियों से बाज आना चाहिए।

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