April 18, 2026

झेलम नदी में बाढ़ से मचा हड़कंप, भारत ने सिंधु जल संधि पर लगाई रोक, पाकिस्तान ने दी जंग की धमकी

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में शनिवार दोपहर झेलम नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने हट्टियन बाला इलाके में वाटर इमरजेंसी घोषित कर दी और मस्जिदों से भी चेतावनी प्रसारित की जाने लगी। राजधानी मुजफ्फराबाद के डिप्टी कमिश्नर मुदस्सर फारूक ने निवासियों को नदी के पास न जाने की सलाह दी है। फारूक ने आरोप लगाया कि भारत ने जानबूझकर झेलम में सामान्य से अधिक पानी छोड़ा है, जिसकी वजह से बाढ़ की स्थिति बनी। हालांकि उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने और जानवरों को भी नदी के किनारे से दूर रखने की अपील की।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के डायरेक्टर ने भी कहा कि उन्हें पानी छोड़े जाने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। हालांकि सुरक्षा उपाय पहले से ही निचले इलाकों में लागू कर दिए गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय झेलम में हर सेकंड करीब 22,000 घन फीट पानी बह रहा है, जिससे गारी दुपट्टा, मझोई और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में दहशत का माहौल है। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि सिंधु जल संधि के तहत भारत आमतौर पर पहले से सूचना देता था, लेकिन इस बार कोई सूचना नहीं दी गई। अब तक किसी बड़े नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं है और भारत की ओर से भी इस मामले पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

इस बीच भारत ने 24 अप्रैल को बड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला किया है। भारत ने पाकिस्तान को चिट्ठी भेजकर सूचित किया कि संधि अच्छे रिश्तों की नींव पर आधारित थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। भारत ने अनुच्छेद XII (3) के तहत सिंधु जल संधि 1960 में संशोधन की मांग करते हुए नोटिस भेजा है। भारत ने अपने पत्र में लिखा कि जनसंख्या में भारी वृद्धि, क्लीन एनर्जी डेवलपमेंट की जरूरत और पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद जैसी वजहों से इस संधि पर दोबारा विचार करना जरूरी हो गया है। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान ने बार-बार भारत के अनुरोधों की अनदेखी की, जिससे भारत के अधिकार बाधित हुए। इसी कारण भारत ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है।

1960 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच इस संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। समझौते के तहत सिंधु बेसिन की छह नदियों को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बांटा गया था, जिसमें रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का अधिकार भारत के पास और सिंधु, चिनाब और झेलम नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए निर्धारित था। अब भारत पश्चिमी नदियों के 20% पानी को रोकने का अधिकार रखता है। भारत द्वारा संधि को रोकने पर पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे “एक्ट ऑफ वॉर” यानी युद्ध जैसा कदम करार दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में भारत पर आरोप लगाते हुए आतंकियों को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताया है। डार ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि हमला किसने किया, लेकिन भारत पाकिस्तान पर इल्जाम लगाकर अपनी नाकामी और आंतरिक राजनीति को ढकने की कोशिश कर रहा है। वहीं, बिलावल भुट्टो ने भी भारत को चेतावनी दी कि सिंधु नदी पाकिस्तान की है और अगर उसमें उनका पानी नहीं बहेगा तो उनका खून बहेगा।

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