April 17, 2026

ईरान पर बढ़ा तनाव: लिंडसे ग्राहम का बड़ा बयान— अयातुल्लाह अली खामेनेई को सत्ता छोड़नी होगी

इजराइल दौरे पर पहुंचे अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान को लेकर बेहद सख्त और अहम बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तेल अवीव में मीडिया से बातचीत के दौरान ग्राहम ने कहा कि ईरान को लेकर बड़ा फैसला अब ज्यादा दूर नहीं है और आने वाले हफ्तों में इस दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को हर हाल में सत्ता छोड़नी होगी। अमेरिकी राजनीति में सख्त रुख के लिए जाने जाने वाले ग्राहम का यह बयान ऐसे समय आया है, जब क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक प्रयास दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले ग्राहम ने कहा कि ईरान के मुद्दे पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के बीच किसी प्रकार का मतभेद नहीं है और दोनों देश इस मुद्दे पर पूरी तरह एकमत हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दो विकल्प खुले हैं— एक कूटनीतिक समाधान और दूसरा सैन्य कार्रवाई। ग्राहम के अनुसार अमेरिकी प्रशासन यह तय करने की दिशा में काम कर रहा है कि कौन सा विकल्प देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिहाज से बेहतर साबित होगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मेजबानी में कूटनीतिक बातचीत हुई थी और आगे भी वार्ता की संभावना बनी हुई है।

इजराइल यात्रा के दौरान ग्राहम ने वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी मुलाकात की। इस बैठक में ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों, मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति और संभावित रणनीतिक विकल्पों पर विस्तार से चर्चा हुई। ग्राहम ने दावा किया कि वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली बार ईरानी नेतृत्व अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था दबाव में है, सैन्य क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं और जनता के भीतर असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। उनके मुताबिक इन परिस्थितियों में सत्ता परिवर्तन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ग्राहम ने यह भी कहा कि ईरान में संभावित सत्ता परिवर्तन का जोखिम वास्तविक है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगी इस जोखिम का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने संकेत दिया कि वॉशिंगटन में अब ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और धैर्य की सीमा कम होती जा रही है। इस बयान को मध्य पूर्व की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियों के तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राहम के बयान से अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव और बढ़ सकता है तथा इसका असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित वार्ता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि इस मुद्दे का असर केवल दो देशों तक सीमित नहीं बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर भी पड़ सकता है।

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