ईरान में प्रदर्शन दबाने के लिए विदेशी लड़ाकों की तैनाती का दावा, खामेनेई शासन पर गंभीर आरोप
ईरान में पिछले कई महीनों से जारी जनविरोध और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए कट्टरपंथी शासन द्वारा बेहद सख्त और विवादित कदम उठाए जाने का दावा सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार ने हालात पर काबू पाने के लिए देश के भीतर विदेशी शिया लड़ाकों को तैनात किया। यह कदम तब उठाया गया, जब ईरानी सुरक्षा बलों के एक बड़े हिस्से ने अपने ही नागरिकों पर हिंसा करने से इनकार या हिचक दिखाई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी कारण शासन ने पड़ोसी देश इराक से सशस्त्र लड़ाकों को बुलाने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि करीब पांच हजार इराकी लड़ाके धार्मिक तीर्थयात्रियों के भेष में ईरान में दाखिल हुए। ये लड़ाके ईरान समर्थित शिया संगठनों जैसे काताइब हिज्बुल्लाह, हरकत हिज्बुल्लाह अल-नुजबा और बद्र संगठन से जुड़े बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन लड़ाकों की तैनाती के बाद कई शहरों में सुरक्षा कार्रवाई और ज्यादा आक्रामक हो गई। प्रदर्शन स्थलों पर गोलीबारी, गिरफ्तारियों और जबरन कार्रवाई की घटनाओं में तेजी आई, जिससे आम नागरिकों में भय का माहौल गहराता चला गया।
सूत्रों का कहना है कि इन विदेशी लड़ाकों को विशेष रूप से उन इलाकों में तैनात किया गया, जहां सरकार विरोधी आंदोलन सबसे मजबूत थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई जगहों पर सुरक्षा बलों की भाषा और व्यवहार से यह साफ हो गया कि वे ईरानी नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन लड़ाकों को प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के खुले निर्देश दिए गए थे, जिसके चलते हिंसा का स्तर और बढ़ गया। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इसी दौरान मौतों और घायल होने वालों की संख्या में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ईरान सरकार ने इन आरोपों पर अब तक कोई स्पष्ट और सीधा खंडन नहीं किया है। हालांकि, आधिकारिक बयानों में यह कहा गया है कि देश में अशांति फैलाने के पीछे विदेशी साजिशें हैं और अमेरिका व इजराइल समर्थित ताकतें हालात को बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं। तेहरान प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा बल केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं और विदेशी लड़ाकों की तैनाती जैसी बातें निराधार हैं।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और ईरानी विपक्षी समूहों ने इन दावों को बेहद गंभीर बताया है। संगठनों के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग जेलों में बंद हैं। उनका कहना है कि अगर विदेशी लड़ाकों की तैनाती के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन का एक नया और खतरनाक अध्याय होगा, जिस पर वैश्विक समुदाय को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
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