ईरान का इस्फहान बेस बचा, अमेरिका के सबसे घातक हमले भी नहीं दिखा पाए असर
ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करने के मकसद से अमेरिका ने हाल ही में तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज़ और इस्फहान—पर बड़ा हमला किया। इन हमलों में आधुनिक टॉमहॉक मिसाइलों और हवाई हमलों का इस्तेमाल हुआ, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि इनमें से सबसे अहम और संवेदनशील ठिकाना इस्फहान लगभग पूरी तरह सुरक्षित बचा रहा।
इस्फहान को ईरान का न्यूक्लियर खजाना माना जाता है, क्योंकि यहां करीब 60% संवर्धित यूरेनियम का भंडार होने की बात कही जाती है। यही यूरेनियम किसी भी देश को परमाणु बम बनाने की क्षमता देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि अमेरिका के सबसे शक्तिशाली हथियार भी इस पर असर क्यों नहीं डाल सके।
पेंटागन के अधिकारियों ने बताया कि इस्फहान का ठिकाना जमीन के काफी नीचे स्थित है, जहां तक अमेरिका के बंकर-बस्टर बम भी नहीं पहुंच पाए। यही वजह रही कि अमेरिका ने इस पर सिर्फ सतही मिसाइल हमलों तक खुद को सीमित रखा। विशेषज्ञों के अनुसार इन हमलों से सिर्फ ऊपरी संरचना को नुकसान पहुंचा, जबकि अंदर छिपा असली स्टॉक बचा रहा।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि हो सकता है ईरान ने हमले से पहले अपना कुछ यूरेनियम किसी और जगह पर शिफ्ट कर दिया हो। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि यूरेनियम की शिफ्टिंग नहीं हुई, लेकिन अमेरिकी सांसदों ने खुद माना कि इस बारे में किसी के पास स्पष्ट जानकारी नहीं है।
इस हमले के बावजूद ईरान की परमाणु ताकत पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। जानकार मानते हैं कि भले ही इस हमले ने जमीनी स्तर पर कुछ नुकसान पहुंचाया हो, लेकिन ईरान की असली क्षमता अब भी बनी हुई है और खतरा अभी टला नहीं है।
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