IPO निवेशकों को राहत: SEBI का बड़ा यू-टर्न, 35% कोटा बरकरार
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने रिटेल निवेशकों के लिए बड़ा फैसला लिया है। पहले SEBI ने 5,000 करोड़ रुपये से बड़े IPO में रिटेल निवेशकों का कोटा 35% से घटाकर 25% करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अब इस पर यू-टर्न लेते हुए कहा गया है कि 35% कोटा बरकरार रहेगा। इस फैसले से छोटे निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।
SEBI ने पहले तर्क दिया था कि बड़े IPO में रिटेल निवेशकों की भागीदारी कम हो रही है, इसलिए इस हिस्सेदारी को घटाकर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) को ज्यादा अवसर दिया जाना चाहिए। हालांकि, निवेशकों और मार्केट विशेषज्ञों ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि इससे छोटे निवेशक IPO से दूर हो जाएंगे और केवल बड़े संस्थागत निवेशकों को फायदा होगा।
विरोध को देखते हुए SEBI ने स्पष्ट किया है कि वह सभी हितधारकों की राय पर ध्यान देगा और रिटेल निवेशकों का कोटा नहीं बदलेगा। साथ ही, बड़े IPO में सब्सक्रिप्शन की समस्या को हल करने के लिए कंपनियों को कम हिस्सेदारी के साथ लिस्टिंग की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा, न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों को पूरा करने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा।
SEBI के 31 जुलाई 2025 के कंसल्टेशन पेपर में प्रस्ताव था कि रिटेल कोटा घटाकर 25% कर दिया जाए और QIB का कोटा 50% से बढ़ाकर 60% किया जाए। लेकिन अब नया सुझाव यह है कि म्यूचुअल फंड्स के लिए QIB कैटेगरी में आरक्षण 5% से बढ़ाकर 15% किया जाए, ताकि अप्रत्यक्ष रूप से रिटेल निवेशकों को भी फायदा मिले।
विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI का यह कदम IPO मार्केट में संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा। छोटे निवेशकों का भरोसा बना रहेगा और साथ ही म्यूचुअल फंड्स के जरिए उनकी भागीदारी और मजबूत होगी। इस फैसले के बाद आने वाले बड़े IPO में निवेशकों का उत्साह एक बार फिर बढ़ने की संभावना है।
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