वेस्टइंडीज के ओपनर जॉन कैंपबेल ने भारत के खिलाफ दिल्ली में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में शानदार शतक जमाया. पहली पारी में केवल 10 रन बनाने वाले कैंपबेल ने वापसी करते हुए 173 गेंदों में 115 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 3 छक्के शामिल थे. उनका यह शतक भारतीय दर्शकों के लिए भी रोमांचक रहा, क्योंकि उन्होंने इसे छक्के से पूरा किया और अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई.
कैंपबेल के लिए यह टेस्ट करियर का पहला शतक है, जो उन्होंने अपने 6 साल, 25 टेस्ट और 50 पारियों के लंबे इंतजार के बाद बनाया. इससे पहले उन्होंने तीन बार 50 प्लस स्कोर किया था, लेकिन शतक नहीं बना पाए थे. दिल्ली टेस्ट से पहले उनका टेस्ट करियर का सर्वोच्च स्कोर 68 रन था. इस शतक ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक नई उपलब्धि दिलाई, जबकि वनडे में उन्होंने पहले ही स्कॉटलैंड के खिलाफ शतक जड़ा था.
जॉन कैंपबेल ने अपने साथी बल्लेबाज शे होप के साथ तीसरे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी भी की. दोनों ने 295 गेंदों में 177 रन जोड़कर वेस्टइंडीज को अपनी पारी बचाने का मौका दिया. यह साझेदारी टीम के लिए खेल का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई और उन्हें हार के खतरे से बाहर निकाला.
कैंपबेल अंततः 199 गेंदों में 115 रन बनाकर रवींद्र जडेजा की गेंद पर आउट हुए. उनके शतक और होप के साथ साझेदारी ने वेस्टइंडीज को मजबूत स्थिति में ला दिया है. इस प्रदर्शन से कैंपबेल की बल्लेबाजी क्षमता और भी उजागर हुई, और उन्हें अपनी टीम के लिए निर्णायक खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया.
दिल्ली टेस्ट में जॉन कैंपबेल का यह प्रदर्शन वेस्टइंडीज क्रिकेट के लिए यादगार क्षण साबित हुआ है. उनके शतक और साथी बल्लेबाजों के समर्थन से टीम ने अपनी पारी को संभाला, और मैच के रोमांचक मोड़ पर पहुंचाया है. फैंस और विशेषज्ञ दोनों ही इस प्रदर्शन की काफी सराहना कर रहे हैं, और उनके टेस्ट करियर के अगले अध्याय के लिए उत्साहित हैं.
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