भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम के बाद उठे बड़े सवाल: क्या भरोसेमंद है पाकिस्तान?
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच आखिरकार 87 घंटे की कड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद संघर्ष विराम लागू हो गया, लेकिन यह शांति अधिक देर तक टिक नहीं सकी। संघर्ष विराम के केवल चार घंटे बाद ही पाकिस्तान ने फिर से सीमा पर गोलीबारी और ड्रोन के जरिए घुसपैठ की कोशिश कर अपनी पुरानी आदत दोहराई। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंक के नौ ठिकानों को ध्वस्त किया, जिसमें कई कुख्यात आतंकी मारे गए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में मिसाइल, ड्रोन और गोलीबारी से हमले शुरू कर दिए। भारत ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली से इन हमलों को नाकाम कर दिया और जवाब में पाकिस्तान के आठ सैन्य ठिकानों पर हमला कर उसे भारी नुकसान पहुंचाया। पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था टूटने के बाद उसने संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा।
भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद संघर्ष विराम लागू हुआ, लेकिन पाकिस्तान ने जल्द ही इसे तोड़ दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की स्थिति स्पष्ट की कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख पर कायम है और वह अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने तुर्किये, चीन और अमेरिका का समर्थन मिलने का दावा करते हुए भारत को झूठी धमकियां दीं।
संघर्ष विराम के उल्लंघन के बाद भारत ने कहा कि उसकी सेनाएं सतर्क हैं और किसी भी अतिक्रमण का कड़ा जवाब देने के लिए तैयार हैं। फिलहाल भारतीय सेनाएं सीमाओं पर अलर्ट मोड में रहेंगी और 12 मई को होने वाली बातचीत के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान पर लगे सभी प्रतिबंध यथावत रहेंगे, जिसमें सिंधु जल संधि, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद रहना, वीजा निलंबन, व्यापार पर रोक आदि शामिल हैं। इन हालात में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तान पर भरोसा किया जा सकता है और क्या यह संघर्ष विराम टिकाऊ होगा?
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