हिंदी सिनेमा के दिग्गज गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने बताया असिस्टेंट डायरेक्टर के शुरुआती दिनों का कठिन और अपमानजनक अनुभव
हिंदी सिनेमा के महान गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने हाल ही में अपने करियर के शुरुआती संघर्षों को याद किया। आज उनकी गिनती इंडस्ट्री के दिग्गजों में होती है और उनकी कलम ने कई कालजयी फिल्में और बेहतरीन गीत दिए हैं। लेकिन ऐसा मुकाम हासिल करने से पहले जावेद को इंडस्ट्री में कई कठिनाइयों और अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
जावेद अख्तर ने 19वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान अपनी बात साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम शुरू किया था। “आज के समय में असिस्टेंट डायरेक्टर की पोजिशन काफी व्यवस्थित और सम्मानजनक हो गई है, लेकिन पुराने जमाने में यह स्थिति बेहद अपमानजनक होती थी,” जावेद ने कहा।
उन्होंने आगे साझा किया कि असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर उन्हें कई तरह के छोटे और कभी-कभी तुच्छ काम करने पड़ते थे। जावेद ने याद करते हुए कहा, “‘तुम्हारा काम क्या है? जल्दी से मैडम के जूते लेकर आओ। हीरो का कोट कहां है? जैकेट कहां है?’—हम यही सब काम करते थे। उस समय हम सिर्फ असिस्टेंट डायरेक्टर थे और किसी स्टार को नाम से बुलाने का सपना भी नहीं देख सकते थे।”
जावेद अख्तर ने बताया कि आज की तुलना में पुराने समय में असिस्टेंट्स का कोई अधिकार नहीं होता था। स्टार्स को उनके काम का पता भी नहीं होता था और उन्हें हर छोटी जरूरत पूरी करनी पड़ती थी। “आज असिस्टेंट्स स्टार्स को नाम लेकर बुलाते हैं, मुझे उन्हें देखकर डर लगता है। उस समय हम कभी सोच भी नहीं सकते थे कि ऐसा दिन आएगा,” उन्होंने कहा।
इस कार्यक्रम में जावेद अख्तर ने यह संदेश भी दिया कि संघर्ष और कठिनाई के बिना सफलता नहीं मिलती। उनके शुरुआती दिनों के अनुभव ने उन्हें आज के मुकाम तक पहुंचने के लिए मजबूती और समझदारी सिखाई। जावेद की यह कहानी आज के युवा और उभरते कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, यह दिखाती है कि बॉलीवुड में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता, बल्कि इसके पीछे वर्षों का कठिन परिश्रम और संघर्ष छिपा होता है।
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