April 20, 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्तन पकड़ने और पायजामा का नाड़ा तोड़ने को बलात्कार नहीं, यौन उत्पीड़न माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए स्तन पकड़ने और पायजामा का नाड़ा तोड़ने को बलात्कार के प्रयास का मामला नहीं माना। न्यायमूर्ति राम मनोहर मिश्र की पीठ ने कासगंज के पटियाली थाने में दर्ज मामले में यह टिप्पणी की, जिसमें तीन आरोपियों की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई की गई। अदालत ने कहा कि ये घटनाएं बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में नहीं आतीं, बल्कि इसे गंभीर यौन उत्पीड़न का मामला माना गया।

इस मामले में कासगंज की एक अदालत ने 2021 में दो आरोपियों, पवन और आकाश, को नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाते हुए मामले की सुनवाई के लिए समन जारी किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी और स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ धारा 376 (बलात्कार) की बजाय धारा 354-बी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला) और पोक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत मामला चलाया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 2021 की है, जब आरोपियों पवन और आकाश ने एक नाबालिग लड़की के साथ कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया था। उनके खिलाफ आरोप था कि उन्होंने लड़की के स्तनों को पकड़ लिया और आकाश ने उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया, इसके बाद उसे खींचने की कोशिश की। हालांकि, गवाहों के हस्तक्षेप के बाद आरोपी मौके से भाग गए।

हाईकोर्ट का निर्णय

हाईकोर्ट ने आरोपियों की पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि इस मामले में बलात्कार के प्रयास का अपराध नहीं बनता है। न्यायालय ने कहा कि जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, उनसे यह साबित नहीं होता कि आरोपियों ने पीड़िता के साथ बलात्कार करने का इरादा रखा था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी ने पीड़िता के शरीर को छेड़ा, लेकिन बलात्कार का कोई प्रयास नहीं किया गया था।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बलात्कार के प्रयास का आरोप नहीं बनता, क्योंकि किसी भी साक्ष्य से यह साबित नहीं होता कि आरोपियों का इरादा बलात्कार करना था। हालांकि, अदालत ने इसे गंभीर यौन उत्पीड़न का अपराध माना और आरोपियों के खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत कार्यवाही का आदेश दिया।

ट्रायल कोर्ट के आदेश पर सवाल

इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने इसे पोक्सो एक्ट के तहत बलात्कार के प्रयास और यौन उत्पीड़न का मामला मानते हुए समन आदेश जारी किया था, जिसे आरोपियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस आदेश को स्वीकार करते हुए आरोपियों के खिलाफ धारा 354-बी और पोक्सो एक्ट के तहत केस चलाने का निर्णय लिया।

कोर्ट का तर्क

कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है जो यह साबित करता हो कि उन्होंने बलात्कार करने का प्रयास किया था। पीड़िता के बयान और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह मामला बलात्कार के प्रयास का नहीं, बल्कि गंभीर यौन उत्पीड़न का है।

इस फैसले ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु पर प्रकाश डाला है, जो बलात्कार और यौन उत्पीड़न के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। अदालत ने इस मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए न्याय का मार्ग प्रशस्त किया है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!