बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना एक बार फिर सुर्खियों में हैं। आम चुनाव से पहले उन्होंने यूनुस सरकार के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। हसीना ने आरोप लगाया है कि बीते 14 महीनों में आवामी लीग के 400 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गोली मारकर हत्या की गई है। उन्होंने इंटरनेशनल मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा सरकार उनके समर्थकों पर अत्याचार कर रही है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए वह अंतरराष्ट्रीय मंच का सहारा ले रही हैं।
हसीना की पार्टी आवामी लीग की ओर से आईसीसी में दाखिल याचिका में कहा गया है कि पुलिस कस्टडी में पार्टी के 25 नेताओं की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 12 हजार कार्यकर्ता अब भी जेल में बंद हैं। हसीना ने कहा कि सरकार न तो इन मामलों में चार्जशीट दाखिल कर रही है और न ही गिरफ्तार लोगों को जमानत का अधिकार दे रही है। उन्होंने कोर्ट से इन मामलों में तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
शेख हसीना के इस कदम से यूनुस सरकार पर दबाव बढ़ गया है। अब तक सरकार केवल हसीना और उनके पूर्व मंत्रियों पर कार्रवाई की बात करती रही थी, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगाए गए आरोपों ने स्थिति बदल दी है। हसीना ने कहा कि अगर उनके खिलाफ नरसंहार जैसे मामलों में मुकदमे चल सकते हैं, तो मौजूदा सरकार के खिलाफ भी ऐसा ही कदम उठाया जाना चाहिए।
दरअसल, शेख हसीना के खिलाफ भी बांग्लादेश में 1,400 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप शामिल हैं। हाल ही में यूनुस सरकार के वकील ने इंटरनेशनल कोर्ट में हसीना को 1,400 बार मौत की सजा देने की मांग की थी। इन आरोपों का सामना करते हुए अब हसीना ने पलटवार किया है और यूनुस सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
इस बीच, यूनुस सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर यूनुस ने कहा कि नवंबर-दिसंबर में आवामी लीग समर्थक विद्रोह करने की कोशिश कर सकते हैं। हसीना ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी पार्टी को फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनाव में भाग लेने से रोका गया, तो उनके समर्थक सड़कों पर उतरने से नहीं हिचकेंगे। आने वाले महीनों में बांग्लादेश की राजनीति और भी गर्म होने की संभावना है।
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