May 1, 2026

हरतालिका तीज 2025: पूजा विधि, व्रत पारण का समय और शुभ मुहूर्त

तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली हरतालिका तीज का पर्व इस वर्ष 26 अगस्त 2025 को है। यह व्रत विवाहित और अविवाहित दोनों ही महिलाओं के लिए अत्यंत महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसी वजह से यह पर्व अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं निर्जला उपवास रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और पूरे विधि-विधान से शिव परिवार की आराधना करती हैं।

 

पूजा से पहले व्रती महिलाएं सबसे पहले मिट्टी से भगवान शिव, देवी पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाती हैं। इन प्रतिमाओं को लाल वस्त्र से सजे हुए पवित्र चौकी पर स्थापित किया जाता है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, माता पार्वती को सोलह श्रृंगार और गणेश जी को दूर्वा अर्पित की जाती है। पूजन के दौरान फल, मिठाई, पान, सुपारी, नारियल और चंदन भी अर्पित किए जाते हैं। शुद्ध देसी घी का दीप जलाकर धूपबत्ती के साथ शिव परिवार की आराधना की जाती है।

 

इस अवसर पर हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। कथा के बाद शिव-पार्वती और गणेश जी की आरती कर व्रती महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य फल मिलता है। गणेश जी को मोदक का भोग लगाना भी विशेष रूप से शुभ माना गया है।

 

पंचांग के अनुसार इस बार हरतालिका तीज की तृतीया तिथि 25 अगस्त 2025 को दोपहर 12:34 बजे शुरू होकर 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे तक रहेगी। ऐसे में 26 अगस्त को ही हरतालिका तीज का व्रत मान्य है। व्रत का पारण 27 अगस्त की सुबह सूर्योदय के बाद किया जाएगा। इस दिन सूर्योदय सुबह 5:57 बजे होगा और इसी के बाद महिलाएं व्रत खोल सकती हैं।

 

ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार का हरतालिका तीज बेहद खास है। इस दिन साध्य योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12:09 बजे तक रहेगा। इसके बाद शुभ योग का आरंभ होगा, जबकि रवि योग पूरे दिन प्रभावी रहेगा। इसके अलावा इस बार गजकेसरी और पंचमहापुरुष जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिन्हें व्रत और पूजन के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

 

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त भी निर्धारित किए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:27 से 5:12 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:57 से दोपहर 12:48 बजे तक होगा और विजय मुहूर्त दोपहर 2:31 से 3:23 बजे तक रहेगा। इन शुभ समयों में किए गए पूजन का फल कई गुना अधिक मिलता है। इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से व्रत-पूजन करने पर प्रेम, विश्वास और खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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