केंद्र सरकार ने ग्रेच्युटी को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि ₹25 लाख तक की बढ़ी हुई ग्रेच्युटी सीमा का लाभ केवल केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों के तहत आने वाले सिविल सेवकों को ही मिलेगा। यानी बैंक, सार्वजनिक उपक्रम (PSU), आरबीआई, विश्वविद्यालय और राज्य सरकारों के कर्मचारी इस दायरे में नहीं आते। इससे उन लाखों कर्मचारियों को झटका लगा है जो इस लाभ की उम्मीद कर रहे थे।
इस साल की शुरुआत में सरकार ने जब ग्रेच्युटी की सीमा ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख की थी, तब ऐसा माना गया कि यह नियम सभी पर लागू होगा। लेकिन अब सरकार ने साफ कर दिया है कि यह लाभ सीमित दायरे में ही रहेगा। कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ने इस पर आधिकारिक आदेश जारी करते हुए कहा कि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं केंद्रीय सरकारी सिविल कर्मचारियों को दी जाएगी, जो विशेष सेवा नियमों के अंतर्गत आते हैं।
दरअसल, मामला 30 मई 2024 को जारी अधिसूचना से जुड़ा है। उसी अधिसूचना में सरकार ने ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाने का ऐलान किया था, जो 1 जनवरी 2024 से लागू भी हो गया। इसके बाद देशभर से सरकार के पास आरटीआई और सवालों की बाढ़ आ गई कि क्या यह सीमा अन्य सरकारी संस्थानों पर भी लागू होती है। इसी भ्रम को दूर करने के लिए अब यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है, ताकि स्पष्ट हो सके कि किसे इस लाभ का हकदार माना जाएगा।
सरकार ने आदेश में कहा है कि ₹25 लाख की अधिकतम ग्रेच्युटी का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2021 या केंद्रीय सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत ग्रेच्युटी भुगतान) नियम, 2021 के तहत आते हैं। यदि कोई कर्मचारी इन नियमों के दायरे में नहीं आता, तो उसे यह बढ़ा हुआ लाभ नहीं मिलेगा, भले ही वह केंद्र सरकार से जुड़े किसी अन्य विभाग में कार्यरत हो।
इस स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कई बड़े संस्थान जैसे सार्वजनिक उपक्रम (PSUs), सरकारी बैंक, ग्रामीण बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), बंदरगाह ट्रस्ट, विश्वविद्यालय और राज्य सरकारों के कर्मचारी इस बढ़ी हुई ग्रेच्युटी सीमा से बाहर रहेंगे। सरकार ने कहा कि इन संस्थानों के कर्मचारियों को अपनी ग्रेच्युटी संबंधी जानकारी और नियमों के लिए अपने-अपने मंत्रालय या विभाग से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि उनके सेवा नियम केंद्र सरकार के सिविल सेवकों से अलग हैं।
कुल मिलाकर, यह फैसला केंद्रीय सिविल सेवकों के लिए तो राहत भरा है, लेकिन बाकी सरकारी कर्मचारियों के लिए निराशाजनक साबित हुआ है। अब उम्मीद यही है कि भविष्य में सरकार अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए भी ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने पर विचार करे, ताकि समानता और पारदर्शिता बनी रहे।
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