गोल्ड–सिल्वर की चमक या इक्विटी की उड़ान, दिग्गज ब्रोकरेज ने बताया अगले साल का निवेश रोडमैप
साल 2025 अब अपने अंतिम दौर में है और निवेशकों की नजरें 2026 पर टिक चुकी हैं। बीते एक साल में शेयर बाजार ने भले ही नए रिकॉर्ड बनाए, लेकिन उतना दमदार रिटर्न नहीं दे पाया, जितनी उम्मीद की जा रही थी। दूसरी ओर सोना और चांदी निवेशकों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं रहे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2026 में पैसा कहां लगाना ज्यादा फायदेमंद रहेगा—सोना-चांदी में या शेयर बाजार में? इस सवाल का जवाब देने की कोशिश देश की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म कोटक सिक्योरिटीज ने अपने लेटेस्ट आउटलुक में की है।
कोटक सिक्योरिटीज के मुताबिक, 2025 में शेयर बाजार पर कई बाहरी दबाव रहे। अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी, रुपये में कमजोरी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ाया। इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई और निफ्टी 50 सितंबर 2024 के पीक से करीब 17 फीसदी गिरने के बाद फिर उबरते हुए 2025 के अंत तक नया ऑल टाइम हाई छूने में कामयाब रहा। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान लार्ज-कैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि मिड और स्मॉल-कैप शेयर अपेक्षाकृत कमजोर रहे। ऑटो, बैंकिंग और मेटल सेक्टर ने बाजार को सहारा दिया, वहीं आईटी और FMCG सेक्टर पिछड़े रहे।
ब्रोकरेज का मानना है कि 2026 में शेयर बाजार के लिए माहौल अनुकूल रह सकता है। निफ्टी की कमाई (Earnings) में वित्त वर्ष 2027 में 17.6 फीसदी और वित्त वर्ष 2028 में 14.8 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है। बेस केस में दिसंबर 2026 तक निफ्टी के 29,120 तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। अगर हालात ज्यादा सकारात्मक रहे तो निफ्टी 32,000 के पार भी जा सकता है, जबकि नेगेटिव स्थिति में इसके 26,200 तक फिसलने की आशंका है। 2026 के लिए बैंकिंग एवं फाइनेंशियल सर्विसेज (BFSI), टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को हॉट बताया गया है।
वहीं कमोडिटी मार्केट की बात करें तो 2025 में सोना और चांदी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। वैश्विक अनिश्चितता, जियो-पॉलिटिकल तनाव और सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी के चलते सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गईं। भारत में वायदा बाजार में सोना करीब 71 फीसदी का रिटर्न दे चुका है, जबकि चांदी ने 121 फीसदी की शानदार बढ़त दर्ज की है। कोटक सिक्योरिटीज का मानना है कि 2026 में भी सोना एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर अपनी चमक बनाए रखेगा, खासकर तब जब वैश्विक जोखिम बने रहेंगे।
कोटक सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ श्रीपाल शाह के अनुसार, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ग्रोथ का मजबूत केंद्र बना हुआ है। इक्विटी में लंबी अवधि के लिए सकारात्मक नजरिया है, जबकि सोना जोखिम भरे समय में पोर्टफोलियो को संतुलन देने का काम करेगा। उनका मानना है कि युवा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से भारतीय बाजार में वेल्थ क्रिएशन के नए मौके बनेंगे। कुल मिलाकर, 2026 में समझदारी इसी में है कि निवेशक सोना और शेयर—दोनों में संतुलित निवेश रणनीति अपनाएं, ताकि जोखिम भी कम हो और कमाई के मौके भी बने रहें।
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