April 21, 2026

सोना बना निवेशकों का भरोसेमंद साथी, आर्थिक अनिश्चितताओं में भी कायम है चमक

राजा-महाराजाओं के जमाने से लेकर आज के दौर के अरबपतियों तक, सोना एक ऐसी धातु रही है जिसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ी। पहले यह सिर्फ धन और वैभव का प्रतीक हुआ करता था, लेकिन आज भी इसकी अहमियत उतनी ही बनी हुई है। समय भले ही बदल गया हो, लेकिन जब भी आर्थिक अस्थिरता या वैश्विक संकट की बात आती है, तो निवेशक सबसे पहले सोने की ओर ही रुख करते हैं। इसे आज भी ‘अनिश्चितताओं का राजा’ कहा जाता है। आभूषण के रूप में ही नहीं, बल्कि निवेश के रूप में भी सोने की मांग लगातार बनी हुई है। चाहे वह सेंट्रल बैंक हो, कोई बड़ा निवेशक या फिर एक आम आदमी—हर किसी के पोर्टफोलियो में सोना किसी न किसी रूप में जरूर शामिल रहता है।

अगर बात करें दुनिया में सबसे ज्यादा सरकारी गोल्ड रिजर्व की, तो फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2024 तक अमेरिका सबसे आगे रहा। अमेरिका के पास 8,134 टन सोना था, जो वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा भंडार है। इसके बाद जर्मनी, चीन और फिर भारत का नंबर आता है। भारत के पास फिलहाल 876 टन सोना है, जो कि राष्ट्रीय रिजर्व का हिस्सा है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी भंडार से कहीं ज्यादा सोना आम लोगों के पास जमा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास लगभग 24,000 टन सोना मौजूद है, जो दुनिया के सभी सेंट्रल बैंकों के कुल स्टॉक के बराबर है। इस मामले में चीन दूसरे नंबर पर है, जहां की जनता के पास लगभग 20,000 टन सोना है।

वर्तमान समय में सोने की कीमत भारत में 95,240 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुकी है और यह जल्द ही 1 लाख रुपये के स्तर को छू सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें, तो वहां सोना 3,333 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जिसने बीते एक वर्ष में लगभग 40 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो अपने निवेश पोर्टफोलियो का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा सोने में लगाना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। ऐसे में अगली बार जब आप कोई सोने की अंगूठी, सिक्का या बार खरीदें, तो उसे केवल एक जेवर या उपहार न समझें, बल्कि अपनी आर्थिक सुरक्षा की एक मजबूत दीवार के रूप में देखें

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