सोने के लिए यह साल बेमिसाल, अब तक 32% बढ़ी कीमत; जानिए क्यों आ रही है इतनी तेजी
सोने की कीमतों में इस साल जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। 2025 की शुरुआत से अब तक गोल्ड करीब 32 फीसदी भाग चुका है। निवेशकों के लिए यह साल सोने के लिहाज से बेहद खास रहा है। वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोने को एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जा रहा है और यही कारण है कि इसमें लगातार तेजी बनी हुई है। भारत ही नहीं, बल्कि विदेशी बाजारों में भी गोल्ड ने इस साल अब तक शानदार रिटर्न दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बनने और उनके द्वारा कई देशों पर नए टैरिफ लगाए जाने के फैसले से ग्लोबल इकोनॉमी पर दबाव बढ़ा है। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है। जब भी भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक संकट की आशंका बढ़ती है, तब निवेशकों का झुकाव सोने की तरफ बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस साल सोने ने अब तक 32% तक की उछाल दर्ज की है। डॉलर के मुकाबले सोना मजबूत हो रहा है और इसका असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने की तेजी के पीछे एक और बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। डॉलर में कमजोरी और सेंट्रल बैंकों द्वारा डॉलर रिजर्व से दूरी बनाना भी गोल्ड के लिए सपोर्ट साबित हुआ है। इस साल की शुरुआत से डॉलर इंडेक्स में करीब 11% की गिरावट आई है। यूरोप और जापान जैसे देशों में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सरकारी बॉन्ड की डिमांड घटी है और निवेशकों का रुझान सोने की ओर बढ़ा है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो सोना भविष्य में और भी ज्यादा महंगा हो सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार इस समय सकारात्मक संकेत दे रहा है। भारतीय निफ्टी इंडेक्स इस साल अब तक 5% ऊपर है, जबकि अमेरिकी S&P 500 इंडेक्स करीब 9% की बढ़त दर्ज कर चुका है। अमेरिकी शेयर मार्केट रिकॉर्ड हाई पर है और भारतीय शेयर बाजार भी अपने उच्च स्तर के आसपास बना हुआ है। शेयर बाजार की वोलैटिलिटी कम है, जबकि करेंसी और बॉन्ड मार्केट मंदी का संकेत दे रहे हैं। ऐसे में सोना और शेयर मार्केट दोनों का साथ-साथ बढ़ना बाजार की दिशा को लेकर असमंजस की स्थिति को दर्शाता है।
एक और दिलचस्प पहलू यह है कि रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की रणनीति अलग-अलग नजर आ रही है। जहां रिटेल इनवेस्टर्स गोल्ड और शेयर दोनों में निवेश कर रहे हैं, वहीं करेंसी और बॉन्ड मार्केट में इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स का दबदबा है और उनकी चाल से निराशावादी रुख झलक रहा है। इतिहास गवाह है कि लंबे समय में इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की रणनीति ज्यादा सफल रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में सोने की यह रैली बरकरार रहती है या फिर शेयर बाजार में कोई बड़ा करेक्शन देखने को मिलता है।
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