गाजा के लिए रवाना ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला को इजराइल ने बीच समुद्र में रोका, क्यों बढ़ा विवाद?
गाजा की ओर मानवीय राहत सामग्री लेकर जा रहे सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बेड़े को इजराइली नौसेना ने रोका। इसमें पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और मांडेला परिवार के सदस्य समेत 44 देशों के 500 से ज्यादा लोग शामिल थे। इजराइल ने इन्हें हिरासत में ले लिया है।
गाजा के लिए मानवीय मदद लेकर रवाना हुए ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला (Global Sumud Flotilla) को इजराइली नौसेना ने बुधवार को बीच समुद्र में रोक दिया। यह घटना गाजा में बिगड़ते मानवीय हालात के बीच हुई है, जहाँ संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही भुखमरी और कुपोषण को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।
फ्लोटिला में दुनिया के कई देशों से आए कार्यकर्ता, सांसद और सामाजिक नेता शामिल थे। इनमें स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के पोते मांडला मंडेला जैसे नाम भी शामिल हैं। इजराइल ने जहाजों को कब्जे में लेकर सभी को हिरासत में ले लिया और बाद में कहा कि सभी सुरक्षित हैं और उन्हें अश्केलोन बंदरगाह ले जाया जा रहा है।
ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला क्या है?
यह अब तक का सबसे बड़ा समुद्री मानवीय अभियान बताया जा रहा है। 31 अगस्त 2025 को स्पेन से रवाना हुए इस मिशन में शुरुआत में 50 से अधिक जहाज और 44 देशों से आए 500 से ज्यादा लोग शामिल थे। रास्ते में यह इटली, ग्रीस और ट्यूनिसिया जैसे बंदरगाहों पर रुका।
मिशन का मुख्य उद्देश्य गाजा तक दवाइयाँ, भोजन और पानी जैसी ज़रूरी सामग्री पहुँचाना और 2007 से जारी इजराइली नौसैनिक नाकाबंदी को चुनौती देना था। आयोजकों का दावा था कि यह पूरी तरह मानवीय पहल है और इसमें किसी राजनीतिक या सैन्य संगठन का हस्तक्षेप नहीं है।
यात्रा के दौरान चुनौतियाँ और हमले
इस अभियान को रास्ते में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि माल्टा और क्रीट के पास कुछ जहाजों पर ड्रोन हमले हुए, जिससे कई जहाज क्षतिग्रस्त हो गए और पीछे लौटना पड़ा। इसके बावजूद लगभग 44 जहाज पूर्वी भूमध्य सागर तक पहुँचने में सफल रहे।
स्पेन और इटली ने अपने युद्धपोत तैनात कर फ्लोटिला पर नज़र रखी। यूरोपीय और अन्य देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। इसके बावजूद इजराइल ने सख्त कार्रवाई का रास्ता चुना।
इजराइल की कार्रवाई और दलील
इजराइली नौसेना ने गाजा पहुँचने से करीब 130 किलोमीटर पहले फ्लोटिला को घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इजराइली जहाजों ने तेज रोशनी, पानी की तोपों और फोर्स का इस्तेमाल कर जहाजों पर चढ़ाई की और उन्हें कब्जे में ले लिया।
इजराइल का कहना है कि यदि कार्यकर्ताओं का मकसद मानवीय मदद पहुँचाना है, तो उन्हें अश्केलोन बंदरगाह पर रुकना चाहिए था, जहाँ जांच के बाद सामग्री गाजा भेजी जा सकती थी। लेकिन आयोजक सीधे गाजा जाना चाहते थे, जिससे सुरक्षा को खतरा था। इजराइल का यह भी दावा है कि फ्लोटिला का हमास से संबंध हो सकता है।
गाजा पर नाकाबंदी और विवाद की जड़
गाजा पर इजराइली नाकाबंदी 2007 से लागू है, जब हमास ने यहाँ सत्ता संभाली थी। अक्टूबर 2023 के हमास हमले और उसके बाद शुरू हुए युद्ध के बाद से यह नाकाबंदी और कड़ी कर दी गई। इजराइल का मानना है कि गाजा में बिना जांच के किसी भी तरह की सामग्री जाने देना उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है।
दूसरी ओर, आयोजकों का कहना है कि यह आरोप निराधार हैं और फ्लोटिला का एकमात्र उद्देश्य गाजा के लोगों तक राहत सामग्री पहुँचाना है। उनका कहना है कि नाकाबंदी ने गाजा को “खुले आसमान वाली जेल” बना दिया है और मानवीय संकट असहनीय स्तर पर पहुँच चुका है।
क्यों बढ़ रहा है विवाद?
फ्लोटिला विवाद नया नहीं है। 2010 में भी एक तुर्की जहाज “मावी मरमारा” को रोकते हुए इजराइली सेना ने कार्रवाई की थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी। इस बार ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला का बड़ा पैमाना और इसमें शामिल मशहूर हस्तियाँ इसे और संवेदनशील बनाता है।
अब दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं कि इजराइल हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस विवाद पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
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