फिरोजाबाद में स्कूली बच्चों से भरी वैन में भड़की आग: गैस रिफिलिंग के दौरान हादसा, एक छात्र झुलसा, बाल-बाल बचे कई मासूम…
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के एका थाना क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक प्राइवेट स्कूल की वैन में स्कूली बच्चों को ले जाते समय अचानक आग लग गई। हादसा रामपुर रोड पर उस वक्त हुआ जब वैन चालक द्वारा चलती गाड़ी में गैस रिफिलिंग की जा रही थी। अचानक हुई गैस लीकेज से गाड़ी में भीषण आग लग गई, जिससे मौके पर हड़कंप मच गया।
गैस लीकेज बना हादसे का कारण, आग की चपेट में आई वैन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वैन में स्कूली बच्चे मौजूद थे और कुछ बच्चे बाहर खड़े थे। इसी दौरान वैन की गैस खत्म हो गई थी, जिस पर चालक ने वहीं गैस रिफिलिंग शुरू कर दी। इस प्रक्रिया के दौरान गैस का लीकेज हो गया, जिससे कुछ ही पलों में वैन ने आग पकड़ ली। चंद सेकंडों में लपटें तेज़ हो गईं और बच्चों की जान खतरे में पड़ गई।
स्थानीय लोगों की सूझबूझ ने टाली बड़ी दुर्घटना
घटना के वक्त वहां मौजूद बबलू और मुकेश नामक दो युवकों ने साहस दिखाते हुए जलती वैन से बच्चों को बाहर निकालना शुरू किया। उनकी बहादुरी की वजह से सभी बच्चों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई। हालांकि इस दौरान अनायास पुत्र विनय कुमार, जो वैन में मौजूद था, चेहरे से झुलस गया। उसे तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। अन्य सभी बच्चे सुरक्षित हैं।
वैन जलकर हुई राख, बच्चों के बैग और कॉपियां भी खाक
आग इतनी भीषण थी कि पूरी वैन कुछ ही मिनटों में जलकर खाक हो गई। वैन में रखे छात्रों के बैग, किताबें और कॉपियां भी जल गईं। घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावक मौके पर दौड़ पड़े और अपने बच्चों को सुरक्षित पाकर राहत की सांस ली। कई माता-पिता भावुक होकर बच्चों को गले लगाते नजर आए।
पुलिस और अग्निशमन विभाग मौके पर पहुंचा
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई। जसराना से अग्निशमन विभाग की गाड़ी बुलवाई गई, जिसने वैन में लगी आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक वैन पूरी तरह से नष्ट हो चुकी थी।
क्यों बढ़ रहा ऐसा खतरा? सवालों के घेरे में स्कूल प्रबंधन और वाहन चालक
इस घटना ने स्कूल वैन की सुरक्षा व्यवस्था और गैस रिफिलिंग जैसी खतरनाक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या स्कूल वैन जैसी जिम्मेदार सेवा में इतनी लापरवाही जायज़ है? क्या ऐसी वैनों की नियमित जांच नहीं होनी चाहिए?
इस तरह के हादसे न सिर्फ बच्चों की जान को जोखिम में डालते हैं, बल्कि अभिभावकों के मन में भी भय पैदा कर देते हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों ने स्कूल प्रशासन और वाहन चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्ष: लापरवाही का खामियाज़ा मासूम क्यों भुगतें?
गनीमत रही कि समय रहते बच्चों को बाहर निकाल लिया गया, वरना यह हादसा भीषण त्रासदी में बदल सकता था। यह एक चेतावनी है कि स्कूली बच्चों के परिवहन को हल्के में लेना अब बंद किया जाए। प्रशासन, स्कूल और परिवहन विभाग को अब सतर्कता बरतनी होगी… क्योंकि अगली बार किसकी बारी होगी, कोई नहीं जानता।
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