April 22, 2026

महायुति सरकार में हलचल, मुख्यमंत्री फडणवीस का सख्त एक्शन, मंत्रियों के स्टाफ पर जांच का आदेश

महाराष्ट्र की महायुति सरकार में एक बार फिर से मतभेदों के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सख्त एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं और उन्होंने अपने मंत्रियों तक को नहीं छोड़ा है। अब उनका ध्यान मंत्रिमंडल के स्टाफ पर है, जहां उन्होंने उनकी स्क्रूटनी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंत्रियों, केबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के नजदीकी स्टाफ की जांच का आदेश दिया है। इससे मंत्रियों के भीतर असंतोष की स्थिति बन गई है, खासकर कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे को लेकर।

मुख्यमंत्री फडणवीस का कड़ा कदम

मुख्यमंत्री फडणवीस ने विशेष रूप से कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे के निजी सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की है और उनके तीन निजी सचिवों को सीएम ऑफिस ने हटा दिया है। इसके अलावा, कई मंत्रियों के पर्सनल स्टाफ, जैसे PA (Personal Assistant), OSD (Officer on Special Duty) और PS (Personal Secretary) की क्रिमिनल बैकग्राउंड जांच की जा रही है। इस आदेश के बाद कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अब हमें अपने OSD और निजी सचिव की नियुक्ति का अधिकार भी नहीं है।

फडणवीस की नसीहत

माणिकराव कोकाटे के इस बयान का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें नसीहत दी। फडणवीस ने कहा, “मंत्री जी को यह समझना चाहिए कि सभी कैबिनेट और राज्य मंत्रियों के निजी स्टाफ को फाइनल करने का अधिकार केवल मुख्यमंत्री के पास होता है। मंत्रीगण अपनी जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय में भेजते हैं, लेकिन उनका नाम फाइनल करने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होता है।” मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि गलत कामों में शामिल लोगों के नाम कभी मंजूर नहीं किए जाएंगे।

गोपनीय जांच की स्थिति

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी बताया कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कैबिनेट में साफ तौर पर कहा था कि मंत्री जो नाम भेजेंगे, उनमें से किसी का भी नाम अगर गलत कामों में शामिल होगा, तो उसे मंजूरी नहीं दी जाएगी। अब तक मुख्यमंत्री को 125 नाम मिले हैं, जिनमें से उन्होंने 109 नामों को मंजूरी दी है। इस पूरी प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री फडणवीस सरकार में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

बीजेपी और शिवसेना के रिश्तों में बढ़ी दूरी?

महाराष्ट्र की राजनीति में अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या बीजेपी और शिवसेना के बीच सब कुछ ठीक है? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना के प्रमुख एकनाथ शिंदे के बीच शीतयुद्ध चल रहा है। इस बात को और बल मिला है जब मुख्यमंत्री कार्यालय ने एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में पारित हुए जालना जिले के खारपुडी प्रोजेक्ट (900 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट) की जांच के आदेश दिए। यह कदम बीजेपी और शिवसेना के रिश्तों में खटास को और बढ़ा सकता है।

फडणवीस द्वारा फैसलों का पलटना

मुख्यमंत्री बनने के बाद, देवेंद्र फडणवीस ने शिंदे सरकार के कई फैसलों को पलट दिया या फिर उन्हें रद्द कर दिया, जिनमें से एक खारपुडी प्रोजेक्ट भी है। इन बदलावों के कारण बीजेपी और शिवसेना के नेताओं के बीच मतभेदों की स्थिति पैदा हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति महायुति सरकार के भीतर छुपे संघर्षों और राजनीतिक असंतोष को उजागर कर सकती है।

महाराष्ट्र में भविष्य की राजनीति क्या दिशा लेगी?

महाराष्ट्र की राजनीति में हो रहे इन घटनाक्रमों ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कड़े कदमों और मंत्रियों के खिलाफ उठाए गए एक्शन ने राज्य में हलचल पैदा कर दी है। अब यह देखना बाकी है कि क्या बीजेपी और शिवसेना के रिश्तों में और खटास आती है, या फिर यह मतभेद सरकार के अंदरूनी विवादों तक सीमित रहेंगे।

महाराष्ट्र में अगले कुछ हफ्तों में क्या होता है, यह राजनीति के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

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