फिजिकल गोल्ड, ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: किस पर कितना टैक्स लगता है, समझें पूरा गणित
सोने की कीमतों में हाल के महीनों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में निवेशक यह समझना चाहते हैं कि फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश करते समय टैक्स का असर कितना पड़ता है। अलग-अलग निवेश विकल्पों पर खरीद और बिक्री के समय अलग टैक्स नियम लागू होते हैं, इसलिए सही विकल्प चुनने से पहले पूरा टैक्स स्ट्रक्चर समझना जरूरी है।
अगर आप फिजिकल गोल्ड जैसे सोने के सिक्के, बार या ज्वेलरी खरीदते हैं, तो उस पर 3% गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) देना होता है। ज्वेलरी के मामले में मेकिंग चार्ज पर अतिरिक्त 5% GST लगता है, जिससे कुल लागत और बढ़ जाती है। यदि सोना विदेश से आयात किया जाता है तो उस पर लगभग 6% कस्टम ड्यूटी भी लागू होती है। यानी फिजिकल गोल्ड खरीदते समय शुरुआती लागत ही अधिक हो जाती है।
वहीं गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड की खरीद पर कोई GST नहीं लगता, क्योंकि इन्हें वित्तीय उत्पाद माना जाता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर भी खरीद के समय GST लागू नहीं होता। यह विकल्प टैक्स के लिहाज से ज्यादा किफायती माना जाता है। हालांकि, ETF खरीदने पर ब्रोकरेज और फंड मैनेजमेंट चार्ज अलग से हो सकते हैं, जो निवेश के रिटर्न को प्रभावित करते हैं।
अब बात करें बिक्री पर लगने वाले टैक्स की। फिजिकल गोल्ड, ETF या डिजिटल गोल्ड को बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। अगर सोना तीन साल से पहले बेचा जाता है तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के तहत यह आपकी आय में जुड़ता है और उसी स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है। तीन साल से अधिक समय तक रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है, जिस पर इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20% टैक्स देना पड़ता है। वहीं सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को यदि मैच्योरिटी (8 वर्ष) तक होल्ड किया जाए तो उस पर मिलने वाला कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री होता है, जो इसे सबसे ज्यादा टैक्स-एफिशिएंट विकल्प बनाता है।
गिफ्ट या विरासत में मिले सोने पर भी नियम अलग हैं। करीबी रिश्तेदारों से मिले सोने पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन अगर गैर-रिश्तेदार से एक वित्त वर्ष में 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का सोना गिफ्ट मिलता है तो वह ‘अन्य आय’ के तहत टैक्स योग्य हो जाता है। कुल मिलाकर, फिजिकल गोल्ड पर शुरुआती टैक्स बोझ ज्यादा होता है, जबकि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड लंबी अवधि के निवेश के लिए सबसे ज्यादा टैक्स लाभ देने वाला विकल्प माना जाता है।
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