May 3, 2026

Etawah में कथावाचक से बदसलूकी: यादव होने पर मर पीटा, पेशाब छिड़का!

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक ऐसी शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। धार्मिक आयोजन के नाम पर जातिगत घृणा और सामाजिक हिंसा का ऐसा वीभत्स रूप सामने आया है, जिसमें मानवीय मर्यादा को रौंदा गया, संविधान की आत्मा को ठेस पहुंचाई गई और धार्मिक श्रद्धा के नाम पर पाखंड की सच्चाई उजागर हो गई।

घटना महेवा क्षेत्र के दांदरपुर गांव की है, जहां शनिवार को श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया था। आयोजकों ने कथावाचन के लिए मुकट मणी उर्फ मुक्त सिंह नामक व्यक्ति को ‘भगवताचार्य’ के रूप में आमंत्रित किया था। मुकट मणी के साथ दो अन्य सहयोगी भी शामिल थे – संत सिंह यादव (निवासी कानपुर देहात) और श्याम सिंह कठेरिया (निवासी अछल्दा)। शुरुआत में सबकुछ सामान्य था, लेकिन जैसे ही कथा का समापन हुआ, पूरे माहौल ने हिंसक मोड़ ले लिया।

कथा समाप्ति के बाद गांव में यह खबर फैल गई कि कथावाचक मुकट मणी ब्राह्मण नहीं, बल्कि अन्य जाति से हैं। बस फिर क्या था, कुछ ग्रामीणों ने कथावाचक से उनकी जाति पूछी, और कथित रूप से जब उन्होंने ‘यादव’ होना स्वीकार किया, तो भीड़ उग्र हो गई। इसके बाद कथावाचक और उनके सहयोगियों को पकड़ लिया गया, गांव के ही एक घर में बंधक बना लिया गया और बर्बरता की सभी हदें पार कर दी गईं।

ग्रामीणों ने कथावाचक की चोटी काट दी, सिर मुंडवाया, नाक रगड़वाकर पूरे गांव में पैर छुआकर माफी मंगवाई। उनकी बाइक की हवा निकाल दी गई और उन्हें ही मजबूर किया गया कि वह खुद हवा दोबारा भरें। यह सब तमाशा घंटों तक चलता रहा, और जब सब हुआ, तो उसका वीडियो भी बनाकर वायरल कर दिया गया। यही नहीं, कथावाचक मुकट मणी ने आरोप लगाया है कि इस दौरान उनसे 25 हजार रुपये नकद, एक सोने की चेन और अंगूठी भी छीन ली गई। इस पूरी घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद राज्यभर में आक्रोश फैल गया है।

इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ पीड़ित मुकट मणी ने सोमवार को सपा सांसद जितेंद्र दोहरे, भरथना विधायक राघवेंद्र गौतम और सपा जिलाध्यक्ष प्रदीप शाक्य के साथ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से मुलाकात की और पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया, जिसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपियों – निक्की अवस्थी (30), उत्तम अवस्थी (18), आशीष तिवारी (21) और प्रथम दुबे उर्फ मनु दुबे (24) – को गिरफ्तार कर लिया। इनके अलावा 50 अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।

हालांकि, घटना के बाद एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कथावाचक मुकट मणी के पास दो अलग-अलग आधार कार्ड पाए गए हैं। एक आधार कार्ड पर नाम ‘मुकट मणी अग्निहोत्री’ और पता औरैया जिले का है, जबकि दूसरे पर नाम ‘मुक्त सिंह’ और पता इटावा जिले के कुशगंवा अहिरन गांव का दर्ज है। लेकिन पुलिस जांच में उनका स्थायी पता इटावा के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के जवाहरपुर में पाया गया है, जो दोनों आधार कार्ड में शामिल नहीं है। विशेष बात यह है कि दोनों कार्ड पर एक ही आधार नंबर है। इस पर पीड़ित का कहना है कि गांव वालों ने उन्हें फंसाने के लिए झूठा आधार कार्ड बनवाकर पुलिस को दिया, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि खुद कथावाचक ने ये कार्ड दिखाए थे। उन्होंने कथावाचक पर यह भी आरोप लगाया कि वे कई जगहों पर खुद को मथुरा या वृंदावन निवासी बताते रहे और कथा सुनाने से पहले खुद को ब्राह्मण के रूप में परिचित कराते थे।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने घटना की निंदा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि यह संविधान और सामाजिक समरसता के खिलाफ है। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि तीन दिन के भीतर सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा, “हमारा संविधान जातिगत भेदभाव की अनुमति नहीं देता, पीड़ित की जाति नहीं, उसका अपमान हुआ है, और इसका बदला कानूनी कार्रवाई से लिया जाएगा।”

वहीं, पुलिस का कहना है कि घटना की जांच हर पहलू से की जा रही है और दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, चोटी काटने, नाक रगड़वाने, और अभद्रता करने वालों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है और आवश्यकता पड़ने पर एनएसए तक लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना सिर्फ एक धार्मिक आयोजन में हुए उत्पीड़न की नहीं, बल्कि उस गहराते जातिवादी सोच की गवाही है जो 21वीं सदी में भी समाज के भीतर गहराई तक जमी हुई है। यह सोच केवल संविधान का अपमान नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता और धार्मिक सहिष्णुता पर भी करारा हमला है। सवाल यह नहीं है कि कथावाचक किस जाति के थे, सवाल यह है कि क्या अब कोई धार्मिक ग्रंथ की कथा भी बिना जाति देखे नहीं सुना सकता? क्या हम अब भी जाति प्रमाणपत्र लेकर श्रद्धा और भक्ति के मंच पर चढ़ेंगे?

इटावा की यह घटना कानून, समाज और प्रशासन – तीनों के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि अगर आज ऐसी घटनाओं को नहीं रोका गया, तो कल मंदिर, कथा, संस्कार और धर्म – सभी जातियों की दीवारों में जकड़े रह जाएंगे।

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