निर्जला एकादशी 2025: पारण का समय, विधि और क्या खाकर व्रत तोड़ें
आज 7 जून को निर्जला एकादशी व्रत का पारण किया जा रहा है, जो इस व्रत का अंतिम लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। शास्त्रों में पारण को व्रत की पूर्णता का आवश्यक संस्कार बताया गया है। यदि पारण विधिवत न किया जाए, तो पूरे व्रत का फल अधूरा रह जाता है। इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।
पारण का समय और तिथि
द्वादशी तिथि प्रारंभ: 6 जून, शाम 6:33 बजे से
पारण मुहूर्त: 7 जून, सुबह 6:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक
शास्त्रों के अनुसार, पारण द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद और निर्धारित समय के भीतर ही करना चाहिए। यदि इस अवधि में पारण नहीं किया गया, तो पुण्य का क्षय होता है।
पारण विधि (कैसे करें पारण)
1. प्रभातकाल में स्नान करें और व्रत समर्पण की भावना से भगवान विष्णु का पूजन करें।
2. पूजा में तुलसी पत्र, पीला पुष्प, फल और पंचामृत अर्पित करें।
3. व्रत तोड़ने से पहले संकल्प करें कि आपने व्रत विधिवत पूर्ण किया।
4. भगवान विष्णु के नामों का स्मरण करते हुए सात्विक भोजन करें।
क्या खाएं व्रत तोड़ते समय
पारण के समय शुद्ध, सात्विक और हल्के भोजन का सेवन करना चाहिए। कुछ उपयुक्त खाद्य पदार्थ:
फलाहार: केला, सेब, पपीता आदि
दूध और दूध से बनी चीज़ें: खीर, दही, छाछ
हल्का सात्विक भोजन: साबूदाना खिचड़ी, समा के चावल, लौकी की सब्ज़ी, सेंधा नमक वाला भोजन
मिठाई में पंजीरी या सूखे मेवों का हलवा
ध्यान दें: पारण के समय लहसुन, प्याज, मांसाहार, तामसिक या गरिष्ठ भोजन से परहेज करें।
पारण का महत्व
पारण केवल उपवास तोड़ने की क्रिया नहीं, बल्कि यह व्रत का आध्यात्मिक समापन है। इसे श्रद्धा और नियमपूर्वक करने पर भगवान विष्णु की कृपा और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार, पारण में लापरवाही करने से व्रत का फल निष्फल हो सकता है।
इस प्रकार, निर्जला एकादशी का पारण व्रत के संकल्प की पूर्ति है, जो मोक्ष की राह को प्रशस्त करता है। इसलिए इसे पूरी आस्था और विधिवत संपन्न करें।
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