बिहार चुनाव में EC की सख्त तैयारी, धनबल और शराब पर रोक के लिए जारी हुए कड़े निर्देश
बिहार में विधानसभा चुनावों की तैयारियां ज़ोरों पर हैं और इस बार निर्वाचन आयोग (EC) ने चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। दरअसल, बिहार में हर चुनाव के दौरान धनबल, शराब और बाहुबल के दुरुपयोग की शिकायतें आम रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने सभी प्रवर्तन एजेंसियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी कीमत पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। आयोग का मकसद है कि इस बार का चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के संपन्न हो।
निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों द्वारा किए जा रहे खर्च की सटीक निगरानी के लिए व्यय पर्यवेक्षकों की तैनाती की है। ये अधिकारी चुनाव की अधिसूचना जारी होने के दिन से ही अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पहुंचकर निगरानी शुरू कर देंगे। आयोग ने बताया कि ये पर्यवेक्षक उड़न दस्तों, निगरानी दलों और वीडियो मॉनिटरिंग टीमों के साथ मिलकर 24 घंटे सक्रिय रहेंगे ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके। उनका उद्देश्य है कि मतदाताओं को पैसे, शराब या किसी अन्य प्रलोभन के ज़रिए प्रभावित करने की कोई कोशिश सफल न हो।
इस बार चुनाव आयोग ने जब्ती प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी साधनों का भी सहारा लिया है। इसके तहत “चुनाव जब्ती प्रबंधन प्रणाली (ESMS)” नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को सक्रिय किया गया है, जिसके माध्यम से उड़न दस्ते, स्थैतिक निगरानी दल और प्रवर्तन एजेंसियां जब्त की गई नकदी, शराब, ड्रग्स या अन्य वस्तुओं की वास्तविक समय में रिपोर्टिंग कर सकेंगी। अब तक की रिपोर्टों के अनुसार, 6 अक्टूबर 2025 को चुनावों की घोषणा के बाद से विभिन्न एजेंसियों ने लगभग 33.97 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी, शराब, ड्रग्स और मुफ्त उपहार जब्त किए हैं।
चुनाव आयोग ने राज्य पुलिस, उत्पाद विभाग, आयकर विभाग, सीमा शुल्क, ईडी, एनसीबी, आरबीआई, सीजीएसटी, एसजीएसटी, रेलवे सुरक्षा बल, सीआईएसएफ, एसएसबी और अन्य कई एजेंसियों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन एजेंसियों को कार्रवाई करते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा या परेशानी का सामना न करना पड़े। आयोग का उद्देश्य अपराधियों पर सख्ती और जनता के प्रति संवेदनशीलता दोनों को समान रूप से बनाए रखना है।
इसके अलावा, चुनाव आयोग ने आम जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए “सी-विजिल” मोबाइल ऐप को भी प्रमुखता से लागू किया है। इस ऐप के जरिए कोई भी नागरिक चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत सीधे आयोग तक पहुंचा सकता है। इस प्रणाली से आम जनता को चुनाव प्रक्रिया में निगरानी की शक्ति मिलेगी, जिससे चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी। आयोग को उम्मीद है कि जनता की सतर्कता और एजेंसियों की सख्ती से इस बार का बिहार चुनाव किसी भी प्रकार की धांधली या अवैध प्रभाव से मुक्त रहेगा।
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