May 1, 2026

दिल्ली: राजधानी बनने की वजहें हुईं धुंधली, पानी और हवा के संकट पर सरकारों की चुप्पी

दिल्ली कभी मीठे पानी, हरियाली और साफ हवा के लिए जानी जाती थी, लेकिन आज वही राजधानी गंभीर पर्यावरण संकट से जूझ रही है। यमुना नदी नाले में तब्दील हो चुकी है, भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और अरावली की पहाड़ियों पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। जिन प्राकृतिक कारणों से दिल्ली को देश की राजधानी बनाया गया था, वे अब लगभग गायब हो चुके हैं।

वायु प्रदूषण की स्थिति और भी भयावह है। दिल्ली-एनसीआर में AQI अक्सर 300 से 500 के बीच पहुंच जाता है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। हर साल सर्दियों में हालात बदतर हो जाते हैं, लेकिन न केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारें ठोस और स्थायी समाधान लागू कर पाती हैं। नदियों के डूब क्षेत्र में निर्माण, पेड़ों की कटाई और बेलगाम शहरीकरण ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली रहने लायक नहीं बचेगी। दूसरे देशों के शहरों ने कड़े कानून, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और हरियाली बढ़ाकर प्रदूषण पर काबू पाया है, लेकिन दिल्ली में अब भी तात्कालिक उपायों तक ही सीमित रहा जा रहा है। सवाल यही है कि क्या सरकारें राजधानी की सेहत को लेकर कभी गंभीर होंगी, या दिल्ली इसी तरह दम घुटती रहेगी?

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!