दिवाली का त्योहार खुशियों का प्रतीक है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए इस दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। फेस्टिव सीजन में बढ़ते धुआं, तेज आवाज़ और अधिक मिठाई से मां और होने वाले बच्चे दोनों की सेहत पर असर पड़ सकता है। दिल्ली एमसीडी के डॉ. अजय कुमार बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं को प्रदूषण और धुएं से खासतौर पर बचना चाहिए।
डॉ. कुमार के अनुसार, पटाखों से निकलने वाला धुआं और केमिकल हवा में कार्बन पार्टिकल्स बढ़ाते हैं, जो सांस की समस्या पैदा कर सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क पहनकर जाएं और किसी भी सांस संबंधी परेशानी पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
खानपान में भी संयम जरूरी है। दिवाली के दौरान मिठाई खाना माना जा सकता है, लेकिन अधिक मात्रा में मीठा ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकता है और गेस्टेशनल डायबिटीज़ का खतरा बढ़ा सकता है। विशेषकर उन महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए जिनका वजन अधिक है या परिवार में डायबिटीज का इतिहास है। इसके अलावा, तली-भुनी और चटपटी चीजें कम खाएं और दिन में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं।
गर्भावस्था में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। दिवाली की तैयारी, सफाई और मेहमानों की वजह से थकान और तनाव होना आम है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पर्याप्त आराम और नींद लें, गहरी सांस लें, ध्यान करें और परिवार से मदद लें। कोई भी भारी फिजिकल वर्क डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।
इस दिवाली गर्भवती महिलाओं के लिए सेहत और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण हैं। प्रदूषण, अधिक मीठा और थकावट से बचकर वे अपनी और बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं।
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