सोने की कीमतों में इस समय तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है. देश के वायदा बाजार और दिल्ली के सर्राफा बाजार दोनों में ही सोना अब तक 60% से ज्यादा महंगा हो चुका है. 2022 से अब तक कीमतों में 140% की वृद्धि देखने को मिली है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस धनतेरस पर सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है? जानकारों का कहना है कि फिलहाल इस स्तर तक पहुंचना मुश्किल है, लेकिन 2026 की शुरुआत तक यह संभव है.
धनतेरस पर कितना रहेगा सोना?
SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च हेड वंदना भारती के अनुसार, रिकॉर्ड ऊंचाई के बावजूद सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी, ईटीएफ की मजबूत मांग, ब्याज दरों में कटौती की संभावना और डॉलर इंडेक्स में गिरावट सोने को और सहारा दे रही है. उन्होंने बताया कि इस धनतेरस तक सोने की कीमतें ₹1,20,000 से ₹1,30,000 प्रति 10 ग्राम के बीच रह सकती हैं, जबकि साल 2026 की शुरुआत में यह ₹1.5 लाख रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है.
गोल्ड ईटीएफ और ग्लोबल फैक्टर्स का असर
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी के लिए सोना पहले ही ₹1.23 लाख के स्तर को पार कर चुका है. रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेड की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों ने सोने में तेजी को बल दिया है. डॉलर की कमजोरी ने भी निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित किया है. इसके अलावा, दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अमेरिकी डॉलर से हटकर अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, जिससे इसकी डिमांड ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है.
निवेशकों के लिए ‘सेफ हेवन’ बना सोना
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में भारतीय गोल्ड ईटीएफ में 902 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जो अगस्त की तुलना में 285% ज्यादा है. भारत अब अमेरिका, ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड के बाद चौथा सबसे बड़ा गोल्ड निवेशक देश बन गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मौजूदा मैक्रोइकोनॉमिक हालात और भू-राजनीतिक तनाव इसी तरह बने रहे, तो 2026 के अंत तक सोना ₹1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है.
जानकारों की राय
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि इस धनतेरस पर सोना ₹1.5 लाख के पार नहीं जाएगा. फिलहाल यह ₹1.26 लाख से ₹1.28 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में रह सकता है. लेकिन जैसे-जैसे ब्याज दरों में कमी और वैश्विक मुद्रास्फीति स्थिर होती जाएगी, सोने की चमक 2026 तक और बढ़ेगी. जियोपॉलिटिकल रिस्क, करेंसी उतार-चढ़ाव और सेंट्रल बैंकों की नीतियां आने वाले महीनों में सोने की दिशा तय करेंगी.
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