हम अक्सर मानते हैं कि प्रदूषण केवल बाहर की हवा में है, लेकिन सच्चाई यह है कि हमारे घरों की हवा भी उतनी ही खतरनाक होती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगरबत्ती, धूपबत्ती और रसोई से निकलने वाला धुआं इनडोर एयर पॉल्यूशन (Indoor Air Pollution) का प्रमुख कारण बन रहा है। सीके बिड़ला अस्पताल के पल्मोनोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. विकास मित्तल के अनुसार, इन चीज़ों से निकलने वाले वॉलेटाइल ऑर्गैनिक कंपाउंड्स और सूक्ष्म कण (PM 2.5) लंबे समय तक शरीर में जाकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।
अगरबत्ती और धूपबत्ती से बढ़ता खतरा
धार्मिक आस्था के तहत घरों में अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाना आम बात है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे निकलने वाला धुआं धीरे-धीरे फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसमें मौजूद सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में जाकर अस्थमा, एलर्जी और सीओपीडी (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से सांस के मरीजों के लिए यह धुआं बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। डॉ. मित्तल कहते हैं कि यह प्रदूषण बाहर की हवा में मौजूद स्मॉग और धूल की तरह ही हानिकारक होता है, बस अंतर इतना है कि यह घर के अंदर छिपा होता है।
रसोई का धुआं भी है साइलेंट किलर
डॉ. मित्तल के मुताबिक, रसोई में बनने वाला धुआं, खासकर बिना चिमनी या वेंटिलेशन वाले घरों में, स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। जो लोग गैस स्टोव पर लगातार तलने-भूनने का काम करते हैं और तेल को बार-बार गर्म करते हैं, उनके घरों में प्रदूषण का स्तर कई बार बाहर की हवा से भी अधिक पाया जाता है। किचन में मौजूद सूक्ष्म कण लंबे समय में सांस से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए खाना बनाते समय एग्जॉस्ट फैन या चिमनी का उपयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए।
घर के अंदर प्रदूषण से कैसे बचें
घर के प्रदूषण से बचने के लिए अगरबत्ती का इस्तेमाल सीमित करें या उसे खुले स्थान पर जलाएं। सुगंध के लिए एसेंशियल ऑयल डिफ्यूज़र या इलेक्ट्रिक फ्रेगरेंस का उपयोग करें। खाना बनाते समय चिमनी या एग्जॉस्ट फैन चालू रखें और तेल को दोबारा गर्म करने से बचें। तलने की बजाय स्टीमिंग, उबालना या बेकिंग जैसे विकल्प अपनाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे बदलावों से इनडोर एयर क्वालिटी को काफी हद तक बेहतर किया जा सकता है और सांस से जुड़ी बीमारियों के खतरे को घटाया जा सकता है।
इस तरह, जिस हवा को हम घर की “सुरक्षित हवा” मानते हैं, वही धीरे-धीरे शरीर के लिए हानिकारक साबित हो रही है। इसलिए जरूरी है कि घर के भीतर भी हवा की सफाई और वेंटिलेशन को उतनी ही गंभीरता से लिया जाए जितनी बाहर की हवा को लेकर चिंता की जाती है।
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