May 3, 2026

सरकार के नए एसी तापमान नियम: कीमतें नहीं बढ़ेंगी, आराम और बचत दोनों बरकरार

नई दिल्ली: सरकार द्वारा घरों और वाहनों में लगने वाले एयर कंडीशनरों (AC) के लिए न्यूनतम और अधिकतम तापमान सीमा निर्धारित करने का जो प्रस्ताव सामने आया है, उस पर इंडस्ट्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। अब AC का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे और 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर सेट नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, इससे ग्राहकों के कंफर्ट या कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, ऐसा AC कंपनियों का कहना है।

AC कंपनियों ने फैसले का स्वागत किया
वोल्टास, एलजी, हायर और ब्लू स्टार जैसी प्रमुख कंपनियों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। वोल्टास के एमडी मुकुंदन मेनन के अनुसार, यह निर्णय स्मार्ट और पर्यावरण-अनुकूल कूलिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, एलजी ने इसे एक “प्रगतिशील कदम” बताया है जो भारत को जिम्मेदार ऊर्जा उपभोग करने वाले देशों की सूची में लाता है।

ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा बोझ
AC कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि इस नए मानक को लागू करने के लिए भले ही रिमोट कंट्रोल और सॉफ़्टवेयर में हल्का बदलाव करना पड़े, लेकिन इसके लिए ग्राहकों से कोई अतिरिक्त पैसा नहीं लिया जाएगा। ब्लू स्टार के बी त्यागराजन ने कहा कि इंसानों को आरामदायक अनुभव देने में हवा का संचार और नमी नियंत्रण ज्यादा जरूरी होता है, न कि बहुत कम तापमान।

कम तापमान = ज्यादा बिजली खर्च
कम तापमान पर AC चलाने से न सिर्फ बिजली की खपत ज्यादा होती है, बल्कि वह शरीर के लिए भी हमेशा आरामदायक नहीं रहता। इस पहल से न सिर्फ बिजली की बचत होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जो पर्यावरण के लिहाज से फायदेमंद है।

बाजार पर क्या असर होगा?
भारत का रूम AC बाजार लगभग 1.5 करोड़ यूनिट्स का है और यह दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ारों में से एक है। इस नियम के आने से पुराने मॉडल्स की बिक्री प्रबंधन, रिमोट्स में बदलाव और सॉफ्टवेयर अपग्रेड जैसी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कंपनियों के अनुसार इसे 2 से 3 महीनों में लागू किया जा सकता है।

एसी के तापमान पर नई सीमा तय करना न ग्राहक के आराम को प्रभावित करेगा, न उसकी जेब पर बोझ डालेगा। इसके बजाय, यह कदम ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण सुरक्षा और दीर्घकालीन आर्थिक बचत की दिशा में एक ठोस पहल है, जिसे उद्योग जगत ने पूरे समर्थन के साथ अपनाया है।

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