डिलीवरी के बाद पीरियड्स आने में क्यों होता है देर? जानिए वजह और सावधानियां
डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में कई जैविक और हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनका असर उनकी मासिक धर्म चक्र (पीरियड्स) पर भी पड़ता है। कुछ महिलाओं को डिलीवरी के 6 से 8 हफ्तों के भीतर पीरियड्स आ जाते हैं, जबकि कुछ को 6 महीने से लेकर एक साल तक इंतजार करना पड़ता है। यह पूरी तरह स्तनपान की स्थिति और हार्मोनल संतुलन पर निर्भर करता है।
डॉक्टरों के अनुसार यदि महिला स्तनपान करा रही होती है, खासकर एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग (जहां बच्चा केवल मां का दूध पी रहा हो), तो प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन का स्तर अधिक होता है। यही हार्मोन दूध बनाने में मदद करता है, लेकिन साथ ही यह ओवुलेशन को रोकता है। ओवुलेशन रुकने से पीरियड्स भी देर से आते हैं। यही कारण है कि ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं में पीरियड्स आने में अक्सर लंबा समय लगता है।
इसके अलावा प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में जो हार्मोन (जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) बढ़ते हैं, वे डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे कम होते हैं। जब तक शरीर अपनी सामान्य स्थिति में वापस नहीं लौटता, तब तक मासिक धर्म भी अनियमित या पूरी तरह बंद रह सकता है। कुछ मामलों में यह देरी पूरी तरह सामान्य होती है, लेकिन यदि स्तनपान न कराने के बावजूद एक साल तक पीरियड्स नहीं आएं, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।
महिलाओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पीरियड्स न होने का मतलब यह नहीं कि ओवुलेशन नहीं हो रहा है। कई बार ओवुलेशन पहले शुरू हो जाता है और बाद में पीरियड्स आते हैं। इस स्थिति में बिना पीरियड्स के भी गर्भधारण संभव है। इसलिए अगर आप दोबारा गर्भधारण नहीं चाहतीं, तो गर्भनिरोधक उपाय अपनाना बेहद ज़रूरी है।
अगर डिलीवरी के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग, पेट में लगातार दर्द या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। पीरियड्स ट्रैक करना और शरीर में हो रहे बदलावों को समझना, महिलाओं के स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद अहम होता है।
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