कांग्रेस की आलोचनाओं पर शशि थरूर का सधा जवाब – “अभी ध्यान नहीं… भारत लौटकर होगी बात”
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर इन दिनों “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत एक खास मिशन पर विदेश दौरे पर हैं। भारत की तरफ से दुनियाभर के देशों में भेजे गए प्रतिनिधिमंडल में शामिल थरूर इस समय ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में हैं। वहां वह पाकिस्तान में पल रहे आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख मजबूती से रख रहे हैं। मगर इस बीच उनकी अपनी पार्टी कांग्रेस के भीतर से उठ रही आलोचनाओं ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
पार्टी के कुछ नेताओं को थरूर की बातें और बयान रास नहीं आ रहे। उदित राज और पवन खेड़ा जैसे वरिष्ठ नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है। उदित राज ने सीधे कहा कि कांग्रेस ने थरूर को सब कुछ दिया, लेकिन अब वे ऐसे बयान दे रहे हैं जो पार्टी के हित के खिलाफ हैं। वहीं पवन खेड़ा ने थरूर पर दोहरापन दिखाने का आरोप लगाया — एक समय उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाए और अब उसी की विदेशों में सराहना कर रहे हैं।
इन आलोचनाओं के बीच जब शशि थरूर से उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने बेहद संयमित और सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा, “अभी मेरा पूरा ध्यान अपने मिशन पर है। यह वक्त इन सब बातों पर ध्यान देने का नहीं है। जब भारत लौटेंगे, तब सभी से खुलकर बात करेंगे — सहयोगियों से, आलोचकों से और मीडिया से भी।”
थरूर ने आगे कहा, “यह समय है कि हम इस अभियान को गंभीरता से लें। आलोचना और असहमति लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इस वक्त हम उन देशों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहां हमें भारत का संदेश पहुंचाना है।”
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस पार्टी के अंदर की खींचतान को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जहां एक तरफ थरूर का शांत और पेशेवर रवैया दिख रहा है, वहीं पार्टी के भीतर उनके रुख को लेकर असंतोष भी खुलकर सामने आ रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां कांग्रेस के कुछ नेता थरूर को निशाने पर ले रहे हैं, वहीं बीजेपी ने उनकी तारीफ की है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि “एक विरोधी पार्टी के नेता को इतनी अहम जिम्मेदारी सौंपना इस बात का प्रतीक है कि भारत वैश्विक मंच पर एकजुटता के साथ खड़ा है। शशि थरूर इस जिम्मेदारी को न केवल बखूबी निभा रहे हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को मजबूती भी दे रहे हैं।”
बीजेपी की तारीफ और कांग्रेस के भीतर से हो रही आलोचनाओं के बीच थरूर की भूमिका और भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या शशि थरूर की यह सक्रियता पार्टी लाइन से इतर है या वह एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी निभा रहे हैं — इस पर चर्चा और विवाद दोनों ही जारी हैं।
इस पूरे प्रकरण ने कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी और वैचारिक दरार को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अब सबकी निगाहें शशि थरूर की भारत वापसी पर टिकी हैं, जहां से शायद एक नई राजनीतिक चर्चा की शुरुआत हो सकती है।
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