उत्तर प्रदेश में कम्यूनिटी हेल्थ वर्कर्स (जन स्वास्थ्य रक्षक) के पुनः समायोजन की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य सरकार को संबोधित एक विस्तृत पत्र में बताया गया है कि यह व्यवस्था भारत सरकार द्वारा वर्ष 1977 में ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। योजना की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि ग्रामीण जनता को आकस्मिक परिस्थितियों में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं गाँवों तक प्रभावी ढंग से पहुँच सकें।
इस योजना के तहत प्रदेशभर में हजारों जन स्वास्थ्य रक्षकों की नियुक्ति की गई थी, जिनका कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिक्षा, प्राथमिक उपचार, टीकाकरण-सहयोग और स्वास्थ्य जागरूकता फैलाना था। योजना की विडंबना यह रही कि इन स्वास्थ्य रक्षकों को उनके महत्वपूर्ण दायित्वों के बावजूद मात्र 50 रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जाता था, फिर भी उन्होंने अपने दायित्वों को वर्षों तक निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया। वर्ष 1977 से लेकर 2002 तक यह योजना भारत सरकार द्वारा लगातार संचालित की गई और प्रदेश की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में इसका बड़ा योगदान रहा।
वर्ष 2002 के बाद भारत सरकार ने यह कहते हुए योजना को बंद कर दिया कि यदि राज्य सरकारें चाहें तो इसे अपने स्तर पर जारी रख सकती हैं। देश के कई राज्यों ने इसे जारी भी रखा और आज भी वहां जन स्वास्थ्य रक्षक सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में इस योजना का संचालन बंद होने के बाद भी इस वर्ग के हजारों लोग जीवित हैं और पुनः सेवा देने के इच्छुक हैं। वर्ष 2019 में विधानसभा के नियम 51 के तहत प्रदान की गई जानकारी के अनुसार केवल 54 जिलों के आधार पर लगभग 34,000 जन स्वास्थ्य रक्षक जीवित पाए गए थे, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक बताई जाती है, क्योंकि कई जिलों का आँकड़ा शामिल ही नहीं था।
महानिदेशक, परिवार कल्याण विभाग द्वारा 2 अगस्त 2019 को विशेष सचिव चिकित्सा अनुभाग-1 को भेजे गए पत्र में भी यह तथ्य दर्ज है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में जन स्वास्थ्य रक्षक मौजूद हैं। कम्यूनिटी हेल्थ वर्कर्स स्वतंत्र इकाई एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष श्री नवाब सिंह के अनुसार आज भी हजारों स्वास्थ्य रक्षक सक्रिय हैं, जिनकी आयु 56 वर्ष या उससे कम है और वे अपनी सेवाएं जारी रखने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार हैं। इन लोगों ने अपने कार्यकाल में ग्रामीण जनता की सेवा करते हुए स्वास्थ्य ढाँचे को मजबूती देने में अमूल्य योगदान दिया था।
इसी आधार पर एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री को आग्रह किया गया है कि इन अनुभवी जन स्वास्थ्य रक्षकों को स्वास्थ्य विभाग में समायोजित किया जाए, क्योंकि यह निर्णय न्यायसंगत होने के साथ-साथ जनहित में भी होगा। पत्र में कहा गया है कि सरकार द्वारा पुनः अवसर दिए जाने पर ये स्वास्थ्य रक्षक ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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