April 20, 2026

20 साल बाद फिर क्यों खतरा बन रहा चिकनगुनिया? भारत में बढ़ी चिंता, जानें लक्षण और बचाव के उपाय

करीब दो दशक के बाद एक बार फिर चिकनगुनिया बीमारी चर्चा में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बीमारी को लेकर वैश्विक अलर्ट जारी किया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वायरस में एक बार फिर वैसी ही जेनेटिक म्यूटेशन देखी गई हैं जैसी 20 साल पहले हुई थीं। इसी वजह से दुनियाभर में सतर्कता बढ़ाई जा रही है। खासतौर पर भारत जैसे देशों में, जहां बरसात और मच्छरों का प्रकोप आम है, वहां इसका खतरा और भी गंभीर हो सकता है।

भारत में पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स ने मॉनसून के चलते चिकनगुनिया को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉ. समीर भाटी के अनुसार, यह बीमारी एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलती है, जो दिन के समय ज्यादा सक्रिय रहते हैं। जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस शरीर में पहुंचकर नसों और मांसपेशियों में तेजी से फैलता है। इसका असर जोड़ों पर खासतौर पर होता है, जिससे मरीज को तेज दर्द और कमजोरी महसूस होती है।

चिकनगुनिया के लक्षणों की बात करें तो यह अचानक और तीव्र रूप से सामने आते हैं। आमतौर पर वायरस के संक्रमण के 2 से 7 दिन बाद मरीज को बुखार, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, थकान, सिरदर्द और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखते हैं। कई बार ये लक्षण इतने गंभीर हो सकते हैं कि मरीज हिलने-डुलने में भी असमर्थ हो जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह संक्रमण ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, चिकनगुनिया का कोई विशेष इलाज नहीं है लेकिन बचाव के उपाय इसे फैलने से रोक सकते हैं। घर और आसपास पानी जमा न होने दें, शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें और मच्छर भगाने वाले उत्पादों का नियमित उपयोग करें। इसके अलावा बुखार या अन्य लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

WHO की चेतावनी के बाद अब भारत समेत अन्य देशों में स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। चिकनगुनिया की वापसी ने यह जता दिया है कि मच्छरजनित बीमारियों के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। आने वाले दिनों में इससे निपटने के लिए लोगों को जागरूकता और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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