केरल के कोल्लम जिले में अचानक चिकनपॉक्स के 100 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों, कॉलेजों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि यह संक्रामक बीमारी अब बच्चों के साथ-साथ युवाओं और प्रेगनेंट महिलाओं में भी देखी जा रही है। अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाए गए हैं ताकि संक्रमित मरीजों का इलाज अलग से किया जा सके और संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
डॉ. एल.एच. घोटेकर ने बताया कि कोल्लम में यह संक्रमण अचानक इसलिए फैला क्योंकि मौसम में बदलाव और ह्यूमिडिटी वायरस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण देती है। स्कूल और हॉस्टल जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में किसी एक संक्रमित व्यक्ति से कई लोगों में यह बीमारी तेजी से फैल सकती है। उन्होंने कहा कि कई मरीज शुरुआती लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं, जिससे वायरस और तेजी से फैलता है। केरल में चिकनपॉक्स का टीकाकरण सरकारी प्रोग्राम में शामिल नहीं है, इसलिए बड़ी संख्या में लोग अब तक वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं।
चिकनपॉक्स के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, थकान, भूख कम लगना और शरीर में दर्द शामिल हैं। दो-तीन दिन बाद त्वचा पर लाल दाने या फफोले निकलते हैं, जो बाद में पपड़ी बन जाते हैं। बचाव के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टीका लगवाएं, संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें, हाथों की सफाई रखें, मरीज के कपड़े और बर्तन साझा न करें, और भीड़भाड़ वाले स्थानों में जाने से बचें। साथ ही, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार लें।
इस तरह स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टर्स की सतर्कता और समय पर उपाय ही कोल्लम जिले में चिकनपॉक्स को फैलने से रोकने में मदद कर सकती है।
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