May 6, 2026

‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों की जांच CBI को सौंपने पर विचार कर रहा सुप्रीम कोर्ट, राज्यों से मांगे आंकड़े

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों पर गंभीर चिंता जताई है और संकेत दिया है कि इनकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जा सकती है। अदालत का मानना है कि यह एक ऐसा साइबर अपराध है, जो पूरे देश को प्रभावित कर रहा है और इसलिए इसकी जांच किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से जुड़े मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा कि राज्यों को यह बताना होगा कि अब तक ऐसे कितने मामले दर्ज किए गए हैं और कितनों पर कार्रवाई हुई है।

 

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी इस तरह के मामलों की जांच करने में सक्षम है और पैन-इंडिया स्तर पर इस अपराध को ट्रैक कर सकती है। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं किया जा रहा, बल्कि सभी राज्यों से जवाब मांगे जा रहे हैं ताकि यह तय किया जा सके कि जांच एजेंसी को किस हद तक दखल देना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो सीबीआई गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले साइबर प्राधिकरणों से तकनीकी सहयोग प्राप्त कर सकती है।

 

गौरतलब है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ एक नया प्रकार का साइबर अपराध है, जिसमें ठग खुद को किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी के रूप में पेश करते हैं और आम लोगों को ऑनलाइन माध्यम से धमकाकर उनसे धन की वसूली करते हैं। बीते कुछ महीनों में इस तरह के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे आम जनता में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अपराध केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है, इसलिए केंद्र और राज्यों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

 

इससे पहले हुई सुनवाई में अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी कि वे इस तरह की ठगी को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही हैं। आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि अगर यह साबित होता है कि राज्य स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, तो पूरे देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी जाएगी। अदालत ने कहा कि एक समान और समन्वित जांच से न केवल अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा, बल्कि जनता का विश्वास भी बहाल किया जा सकेगा।

 

इस बीच, हरियाणा सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने पर कोई आपत्ति नहीं है। राज्य के वकील ने कहा कि अंबाला में दर्ज दो प्रमुख एफआईआर को पहले ही सीबीआई को ट्रांसफर किया जा रहा है, जबकि समान प्रकृति के अन्य मामलों का ब्योरा एक सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राज्य सरकारें अपने-अपने यहां दर्ज डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों की पूरी रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करें, ताकि इस बढ़ते साइबर खतरे से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बनाई जा सके।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!