पिता का दर्द छलका: “CBI भी अब कोलकाता पुलिस की भाषा बोल रही, अब बस न्यायपालिका से है उम्मीद”
समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में पीड़िता के पिता ने अपनी गहरी निराशा और अविश्वास जताया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें न पुलिस पर भरोसा रह गया है और न ही जांच एजेंसियों पर। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि केस को दबाने की कोशिशें हो रही हैं और सच्चाई से सभी आंखें मूंदे हुए हैं।
पिता का कहना था, “हमारा पुलिस पर से पूरा विश्वास उठ चुका है। उन्होंने शुरुआत से ही मामले को गंभीरता से नहीं लिया। लगातार गुहार लगाने के बावजूद निष्पक्ष जांच की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब उन्हें लगता है कि केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) भी अपने कर्तव्य से भटक चुकी है।
उनका आरोप था कि CBI अब वही भाषा बोल रही है जो कोलकाता पुलिस बोलती रही है। इससे साफ है कि या तो एजेंसी पर कोई राजनीतिक दबाव है या फिर किसी मजबूरी में वह समझौता कर चुकी है। पिता की इस पीड़ा से साफ झलकता है कि उन्हें न्याय की आस अब केवल अदालत से है।
“हमें अब सिर्फ न्यायपालिका पर भरोसा है। हम उम्मीद करते हैं कि अदालत इस मामले में सच्चाई सामने लाएगी और दोषियों को सजा दिलाएगी,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे, लेकिन हार नहीं मानेंगे।
परिवार की इस मानसिक स्थिति से साफ है कि वे लगातार खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और इंसाफ की लड़ाई में अकेले पड़ते जा रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या पीड़िता के परिजनों को उनका इंतज़ार किया गया न्याय मिल पाएगा या नहीं।
Share this content:
