पूर्व BSF DIG नरेंद्र नाथ धर दुबे का बड़ा बयान: 26/11 के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर की आवश्यकता, आतंकवादियों की फौज से बढ़ता खतरा
भारत- पाकिस्तान के बीच जारी तनाव और आतंकवाद के मुद्दे पर पूर्व BSF DIG नरेंद्र नाथ धर दुबे ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों और उनके द्वारा संचालित आतंकवादियों के नेटवर्क पर गहरी चिंता व्यक्त की। अमर उजाला से हुई विशेष बातचीत में, दुबे ने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादियों की एक समानांतर फौज काम कर रही है, जो भारत के लिए न केवल एक राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती है, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए भी एक गंभीर खतरे के रूप में उभर रही है।
दुबे ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों के बारे में बात करते हुए कहा कि वे पूरी तरह से प्रशिक्षित और सुसज्जित हैं, और इन आतंकवादियों के पास अत्याधुनिक हथियारों और मिसगाइडेड मिसाइलों का भंडार भी मौजूद है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान के पास ऐसे हथियार हैं, जिन पर खुद पाकिस्तान का भी नियंत्रण नहीं है, और जो आतंकवादियों के हाथों में जा चुके हैं। ऐसे हथियारों का प्रयोग किसी भी समय भारत या अन्य देशों के खिलाफ किया जा सकता है, जो सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।
पूर्व बीएसएफ डीआईजी ने कहा कि यह स्थिति न केवल पाकिस्तान की आंतरिक समस्या है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है। दुबे ने यह भी माना कि भारत को इन खतरों से निपटने के लिए हर समय पूरी तरह से सतर्क रहना चाहिए और किसी भी स्थिति में ढील नहीं देनी चाहिए। उनका यह मानना था कि 26/11 मुंबई हमले के बाद भारत को तुरंत ही पाकिस्तान के खिलाफ कोई बड़ा ऑपरेशन शुरू करना चाहिए था, जैसा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की आवश्यकता थी।
दुबे ने जोर देकर कहा कि यदि उस समय पाकिस्तान के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई होती, तो आज भारत को इन गंभीर खतरों का सामना नहीं करना पड़ता। उनका कहना था कि पाकिस्तान की सीमा के भीतर आतंकवादियों के बढ़ते नेटवर्क और उनके द्वारा फैलाए जा रहे आतंकवाद को नज़रअंदाज़ करना अब भारत की सुरक्षा के लिए और भी खतरनाक हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत को अपनी सुरक्षा नीति में बदलाव लाने की आवश्यकता है और पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई से बचते हुए कठोर कदम उठाने चाहिए। दुबे का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए अब भी समय है, और भारत को अपनी सुरक्षा रणनीतियों में सुधार करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
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